पुलिस और जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते प्रतिबंधित चीनी डोर की ब्रिकी नहीं रुक रही है। इसी का नतीजा है कि मासूम एशलीन मंगलवार को अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठी। दुकानदार चीनी डोर के गट्टू डिब्बे में बंद कर दो सौ से तीन सौ रुपये तक बेचते हैं। इन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं है।
वसंत पंचमी के दिन आकाश में इस कातिल डोर का जाल बिछा हुआ था। कई पक्षी भी इसका शिकार हो गए। कई लोग भी इसकी चपेट में आकर जख्मी हुए। एक व्यक्ति की तो डोर के कारण पगड़ी ही कई जगह से फट गई। सोचिए, यदि पगड़ी न होती तो सिर जख्मी हो जाता। असल में वसंत पंचमी से दो माह पूर्व ही दुकानदार चीनी डोर खरीद कर स्टोर कर लेते हैं। इसे बेचने के लिए दुकानदार विभिन्न कंपनियों के नाम पर डिब्बे तैयार करवाते हैं, उक्त डिब्बों में चीनी डोर के गट्टू डालकर बेचते हैं ताकि किसी को पता न चले। इस बार उसकी सबसे ज्यादा बिक्री हुई है।
पुलिस और जिला प्रशासन चाहते तो वसंत पंचमी वाले दिन जो लोग मकानों की छत पर पतंगबाजी कर रहे थे, उन्हें वहीं काबू करते और दुकानदार का पता पूछ लेते लेकिन इसकी जहमत कौन उठाए। वसंत पंचमी के अगले दिन तो लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल था। डोर पांव में फंसते ही चमड़ी को काट देती है।
यही नहीं स्कूटर व बाइक पर चलने वाले लोग इससे जख्मी भी हुए हैं। गलियों व मुहल्लों की बिजली की तारों पर यह डोर लटकी हुई है। पिछले साल जीरा क्षेत्र में भी एक बाइक सवार के गले पर इस डोर ने गहरा जख्म कर दिया था। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कई व्यक्तियों को चीनी डोर के साथ काबू किया है।