सिद्धू ने नाम लिए बगैर कैप्टन अमरिंदर से पूछा कि क्या पंजाब के हित में कोई फैसले लिए जा रहे हैं। एक फीसदी बड़े लोगों के हित की चिंता की जा रही है या 99 फीसदी आम लोगों की, यह सोचने वाली बात है। पंजाब का किसान मेहनती था, आज कर्ज में डूबा है। पंजाब का नौजवान फौज में भर्ती होकर देश की सेवा करता था। आज नौजवान पलायन कर विदेश जा रहे हैं।
विदेश गए पंजाबी नौजवान घर क्यों नहीं लौट रहे, उनकी मजबूरी है
सिद्धू ने कहा कि यही पंजाबी की बदकिस्मती है। सत्ताधारियों को अपने व्यापार की चिंता है। कैप्टन पर निशाना साधते हुए सिद्धू ने कहा कि वह कहते हैं कि फैसले लेने कठिन हैं। सरकारों के किए फैसले कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को रोटी दे पाते हैं। गरीब तन मन धन से भूखा है, राजसत्ता उनके जीवन में क्या कोई बदलाव लेकर आई। यदि उनके जीवन में खुशहाली नहीं आई तो इसका अर्थ है सत्ताधारियों के फैसलों में कोई कमी है।
कमजोर को ताकत व ताकत वाले को कमजोर करना होगा। सिद्धू ने कहा कि शासकों में अहंकार घर चुका है। बाबा नानक ने तेरा-तेरा का पथ पढ़ाया था, वह मेरा-मेरा में लिप्त हो गए हैं। इस भाव को नष्ट कर सेवा भाव को जगाने की जरूरत है। इसके लिए पंजाबियों को जागना होगा। ऐसा लीडर पैदा करना होगा जो पंजाब को एक परिवार की तरह समझे। सिद्धू ने पंजाबियों से आह्वान किया कि उठो, पंजाब के लिए संघर्ष करो।