दो बार सांसद व तीन बार विधायक रहे डॉ. रतन सिंह अजनाला और उनके बेटे पूर्व विधायक अमर पाल बोनी वीरवार को फिर से शिअद (बादल) में शामिल हो गए। दोनों को 2018 में पार्टी से निकाल दिया गया था। उस वक्त बोनी ने अकाली दल और एसजीपीसी से बादल परिवार का कब्जा हटाने की श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष कसम खाई थी।
शिअद (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शिअद (टकसाली) को करारा झटका देते हुए उनके दो संस्थापक सदस्यों को फिर से पार्टी में शामिल करवाकर विरोधियों को माइक्रो मैनेजमेंट में निपुणता का संदेश दिया। सुखबीर बादल ने अजनाला व उनके बेटे बोनी को उनके घर जाकर शिअद में शामिल किया।
अकाली दल में शामिल होने से पहले बोनी ने सुखबीर के साथ बुधवार दोपहर को ताज होटल और देर शाम रंजीत एवेन्यू स्थित अपने निवास पर बैठक की। दोनों बैठकों के बाद अजनाला व सुखबीर बादल के बीच एक एजेंडा तय किया गया। वीरवार सुबह सुखबीर ताज होटल से सीधा बोनी के निवास स्थान पर पहुंचे।
डॉ. अजनाला ने सुखबीर का गर्मजोशी से स्वागत कर कई वर्षों से पैदा हुई दूरियों को मिटाने में एक पल भी नहीं गंवाया। सुखबीर ने बोनी व डॉ. अजनाला को सिरोपा भेंट कर शिअद में दोबारा शामिल करने के बाद कहा कि अजनाला का परिवार उनका परिवार है। कुछ गिले-शिकवे थे, जो दूर हो गए हैं।
इसके बाद बोनी राजासांसी में आयोजित आक्रोश रैली में शामिल होने के लिए चले गए। वहीं डॉ. अजनाला घर में रहे।
बोनी को टिकट और अजनाला को दिया जा सकता है बड़ा पद
सूत्रों के अनुसार, सुखबीर बादल व बोनी के बीच हुई बैठक में अजनाला विधानसभा हलके से फिर उनको टिकट देने का वादा किया गया है। वहीं डॉ. अजनाला को पार्टी में कोई बड़ा पद दिया जा सकता है। बादल परिवार व डॉ. अजनाला के बीच 2014 के लोकसभा चुनाव में दूरियां बढ़ गईं थीं, जब बादल ने खडूर साहिब लोकसभा सीट से दो बार चुनाव जीते डॉ. रतन सिंह अजनाला की टिकट काटकर जत्थेदार रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा को चुनाव मैदान पर उतारा था, उस समय बोनी विधायक थे।
बादल ने डॉ. अजनाला के परिवार के साथ ऐडजस्टमेंट करने के लिए बोनी को संसदीय सचिव बनाकर झंडी वाली कार देकर नवाजा था। 2012 के विधानसभा चुनाव में बोनी अजनाला से फिर विधायक निर्वाचित हुए। बादल ने फिर बोनी को संसदीय सचिव बनाकर सम्मान दिया। इसके बावजूद डॉ. रतन सिंह अजनाला की दूरियां बादल परिवार से बढ़ती गईं। डॉ. अजनाला ने पार्टी की गतिविधियों में भाग लेना बंद कर दिया। 2016 में बादल ने डॉ. रत्न सिंह अजनाला के साथ उनके घर में एक बैठक की।
बादल ने डॉ. अजनाला को पार्टी में सेक्रेटरी जरनल की जिम्मेदारी सौंपी। इस पर भी डॉ. अजनाला संतुष्ट नहीं हुए। उनको इस बात का गुस्सा था कि दो बार सांसद निर्वाचित होने के बाद बादल ने उनका टिकट काट दिया। क्योंकि वह तीसरी बार चुनाव जीत कर केंद्र में बनी मोदी सरकार में शिअद के कोटे के मंत्री होने के बड़े दावेदार होते। बादल यही नहीं होने देना चाहते थे। दूसरी तरफ बोनी के बिक्रम मजीठिया के साथ मतभेद इतने गहरे हो गए कि उन्होंने मजीठिया को बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ी।
दोनों के बीच दूरियां इतनी बढ़ गई थीं 2017 में विधानसभा का चुनाव हारने के बाद बोनी ने हार का ठीकरा मजीठिया पर फोड़ा।
टकसाली कांग्रेस के पाले में जाना चाहते थे: बोनी
बोनी व डॉ. अजनाला के शिअद में शामिल होने के बाद बिक्रम सिंह मजीठिया ने इसका स्वागत किया है। प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि डॉ. अजनाला का परिवार उनके बहुत ही नजदीक रहा है। उन्होंने पार्टी के विकास के लिए बहुमूल्य सुझाव दिए, जिन पर अमल कर पार्टी मजबूत हुई। बोनी ने राजासांसी में हुई रैली को संबोधित करते हुए कहा कि टकसाली कांग्रेस के पाले में जाना चाहते थे, जो अजनाला परिवार को मंजूर नहीं था। उनका परिवार अकाली है, अकाली रहेगा।
पार्टी से निकाले जाने पर सुखबीर पर लगाए थे कई आरोप
अकाली दल से निकाले जाने पर रतन सिंह अजनाला ने सुखबीर बादल पर आरोप लगाया था कि वह तानाशाह है और अकाली दल का दुर्भाग्य है कि वह एक परिवार का गुलाम बनकर रह गया है। यह पार्टी लूटखसोट वाली नहीं थी, लेकिन अब इस पार्टी को व्यापारिक केंद्र बना दिया गया है। पार्टी में उनकी कोई सुनवाई नहीं है, जिसके चलते उन्होंने पार्टी से किनारा किया है। पार्टी से निकाले जाने के शिअद के फैसले पर अजनाला ने यह भी कहा था कि उनकी सियासत तो अब शुरू हुई है।