दिल्ली चुनाव को जीतने के लिए कई मुख्यमंत्रियों, सांसदों व पंजाब हरियाणा के हजारों कार्यकर्ताओं की फौज चुनाव मैदान में झोंकने के बाद भी मिली हार ने भाजपा संगठन कमजोरियों की पोल खोल दी है।
पार्टी ने दिल्ली के चुनाव में उन नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी सौंपी थी, जो अपने घर में संगठन को मजबूत नहीं कर पाए। दिल्ली चुनाव के इंचार्ज व सह-प्रभारी तरुण चुघ 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद अपने घर का बूथ तक जीत नहीं पाए, ऐसे संगठन स्पेशलिस्ट दिल्ली जैसे राज्य में पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने का पाथ पढ़ाने में नाकाम रहे।
तरुण चुग पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जमीन हकीकत की जानकारी देने में असमर्थ रहे, वही पंजाब से चुनाव प्रचार करने गए भाजपा नेताओं के साथ तालमेल भी नहीं बना पाए। प्रदेश विशेष कर अमृतसर व जालंधर में जितने भी भाजपाई दिल्ली में चुनाव प्रचार के लिए गए उन सभी का एक मात्र उद्देश्य दिल्ली में अपना एक राजनीतिक आका ढूंढना था, ताकि भविष्य में वह आका उनकी राजनीति की गाड़ी को आगे बढ़ा सके।
बेशक पार्टी ने तरुण चुग को पूरे दिल्ली के संगठन व चुनाव इंचार्ज की ड्यूटी दे रखी थी, लेकिन वह भी अपने दोस्त आरपी सिंह के चुनाव प्रचार में अधिक समय जुटे रहे। यही नहीं पूर्व मंत्री अनिल जोशी, पूर्व विधायक भंडारी ने चुनाव प्रचार के दौरान आरपी सिंह के विधानसभा में अधिक समय बताया। इसके बावजूद भी पंजाब से चुनाव प्रचार में गए नेता आरपी सिंह की नैया पार नहीं लगा सके।