साल 2015 के बहिबल कलां पुलिस फायरिंग मामले में मंगलवार को एसआईटी ने तत्कालीन गृह मंत्री और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रधान सुखबीर सिंह बादल से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, उनसे करीब 80 सवाल पूछे गए, जिनमें अधिकांश सवाल इसी बात के इर्दगिर्द घूमते रहे कि बहिबल कलां में धरना दे रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग का आदेश किसने दिया था?
एसआईटी ने सुखबीर बादल को सेक्टर-32 स्थित पंजाब पुलिस आफिसर्स इंस्टीट्यूट में सुबह 10:30 बजे पेश होने का समन भेजा था। सुखबीर 11 बजे पार्टी के सीनियर नेताओं बिक्रम सिंह मजीठिया, डॉ. दलजीत सिंह चीमा, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, गोबिंद सिंह लोंगोवाल, परमबंस सिंह बंटी रोमाना और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वहां पहुंचे। आईजी नौनिहाल सिंह के नेतृत्व में एसआईटी ने सुखबीर बादल से दोपहर दो बजे तक पूछताछ की।
चाहता हूं दोषी पकड़े जाएं पर सियासत न हो: सुखबीर
एसआईटी के समक्ष पेश होने के बाद सुखबीर बादल ने पत्रकारों को बताया कि एसआईटी के अधिकारी उनसे बहिबल कलां मामले से संबंधित जानकारी मांग रहे थे लेकिन सभी सवालों के जवाब उन्हें (एसआईटी को) पहले ही पता हैं। उन्होंने कहा कि सारा पंजाब चाहता है कि दोषी पकड़े जाएं लेकिन इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
पिछली सरकार और मौजूदा सरकार ने भी इस मामले में केवल राजनीति ही की है। विपक्ष के रूप में अकाली दल जब भी कोई मुद्दा उठाता है तो बेअदबी और पुलिस फायरिंग के मुद्दे को उछाल कर हमें समन भेजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब भी अकाली दल द्वारा उठाए जा रहे जनता के मुद्दों से घबराकर उन्हें समन भेज दिया गया।
सरकार का उद्देश्य दोषियों को पकड़ना नहीं बल्कि अपने सियासी विरोधियों के खिलाफ बदले की राजनीति करना है। सुखबीर ने कहा कि सरकार पहले से ही एसआईटी द्वारा मुझसे पूछे गए सवालों के जवाब जानती है। जवाब उनके पास हैं। इसके बावजूद अकाली दल और उसके नेताओं को बदनाम करने की कोशिश है।
सूत्रों के अनुसार सुखबीर बादल से पूछे गए ये सवाल
- सवाल- पुलिस फायरिंग की जानकारी उन्हें किस अफसर ने दी?
- जवाब- उस समय गृह मंत्री होने के नाते मुझे कई अफसर लगातार फोन करके हालात की जानकारी दे रहे थे।
- सवाल- पुलिस फायरिंग की घटना से पहले भी क्या किसी अधिकारी ने हालात की सूचना दी थी?
- जवाब- हालात के बारे में पुलिस और प्रशासन के अफसर मुझे लगातार जानकारी दे रहे थे।
- सवाल- घटना के समय आप पंजाब में थे या कहीं ओर थे?
- जवाब- मैं उस समय चंडीगढ़ में था।
- सवाल- लोगों के धरना-प्रदर्शन की जानकारी आपको कब से थी और इस बारे में कौन आपको अपडेट दे रहा था?
- जवाब- लोगों के धरने के बारे में मुझे लगातार सूचनाएं मिलती रही थीं। प्रशासन व पुलिस के अफसर यह जिम्मेदारी निभा रहे थे।
- सवाल- क्या अधिकारियों ने ऐसे हालात भी बताए कि धरनास्थल पर फायरिंग जरूरी थी?
- जवाब- ऐसे हालात के बारे में मुझे किसी ने जानकारी नहीं दी थी। केवल धरने पर बैठे लोगों के बारे में बताया जा रहा था।
- सवाल- धरना स्थल पर पुलिस फायरिंग की अनुमति किसने दी?
- जवाब- मैंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया, क्योंकि यह जिम्मेदारी एसडीएम के पास थी और वही मौके पर हालात को नियंत्रित कर रहे थे।