हरियाणा सरकार ने विधानसभा में पारित बिल में एचएसजीपीसी कार्यप्रणाली का तानाबाना बुन दिया है।
बिल के मुताबिक हरियाणा सिख गुरुद्वारा (प्रबंधन)अधिनियम, 2014 लागू होने से हरियाणा के पवित्र सिख पूजा स्थलों का उचित प्रबंधन, नियंत्रण, वित्तीय प्रबंधन सुधार को प्रभावी और स्थाई रूप से हरियाणा के सिखों के नियंत्रण में लाया जा सकेगा।
इस समय सिख गुरुद्वारों का नियंत्रण सिख गुरुद्वारा अधिनियम 1925 और उसके तहत बनाए गए नियमों एवं विनियमों के प्रावधानों द्वारा किया जा रहा है।
महिलाओं और हर वर्ग को मिलेगा कमेटी में दर्जा
कमेटी में राज्य के विभिन्न वार्डों से 40 सदस्यों का चयन किया जाएगा। कमेटी के चयनित सदस्यों द्वारा नौ सदस्य सहयोजित किए जाएंगे।
जिनमें से दो सिख महिलाएं, अनुसूचित जाति एवं पिछडे़ वर्गों से संबंधित तीन सदस्य, सामान्य जाति से सिख पंथ का व्यापक ज्ञान रखने वाले दो सदस्य और दो सदस्य प्रदेश की पंजीकृत सिंह सभाओं के अध्यक्षों से सहयोजित किए जाएंगे।
इस तरह से इस कमेटी में कुल 49 सदस्य होंगे। कमेटी के सदस्य के रूप में निर्वाचन या सहयोजन के लिए वे व्यक्ति पात्र नहीं होंगे जिनकी आयु 25 वर्ष से कम है।
सिखों की मतदाता सूचियां भी तैयार की जाएंगी
गुरुद्वारा चुनाव के लिए प्रत्येक वार्ड के मतदाताओं की फोटोयुक्त मतदाता सूचियां तैयार की जाएंगी जिसमें वोटर के रूप में पंजीकरण के लिये पात्र सभी व्यक्तियों के नाम दर्ज किए जाएंगे।
एक व्यक्ति केवल एक वार्ड की मतदाता सूची में ही अपना नाम दर्ज करवा सकता है। मतदाता सूची का गुरुद्वारा चुनाव आयोग द्वारा पंजीकरण करवाया जाना अनिवार्य है।
18 वर्ष से अधिक आयु के सिख मतदान के लिये योग्य होंगे। अधिनियम के तहत हरियाणा सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग का गठन भी किया जाएगा। जिसमें तीन सदस्य शामिल होंगे।