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चंडीगढ़: 50 साल पहले विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने शहर को बताया था लाजवाब, की थी कैपिटल कांप्लेक्स को पूरा करने की मांग 

Tue, 09 Nov 2021 01:41 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय के ग्राउंड फ्लोर पर दोबारा खोले गए आर्किटेक्चर म्यूजियम में शहर की पहली विजिटर्स बुक रखी गई है। इस बुक में नवंबर 1966 से लेकर नवंबर 2021 के बीच आए विभिन्न प्रतिनिधिमंडल की ओर से लिखे गए कोट्स मौजूद हैं। 
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यूटी सचिवालय में रखी गई विजिटर्स बुक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आजादी के बाद बने देश के पहले योजनाबद्ध शहर को देखने के लिए विदेशों से कई प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ पहुंचे थे। ये प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ के आर्किटेक्चर को देखकर हैरान रह गए। किसी ने कहा कि ये शहर अमेरिका के लिए चुनौती है। वहीं, कुछ लोगों ने आपत्ति जताते हुए प्रशासन से आग्रह किया था कि वह कैपिटल कांप्लेक्स को पूरा करें। हालांकि, आज 50 साल बाद भी यह अधूरा ही है।

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सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय के ग्राउंड फ्लोर पर दोबारा खोले गए आर्किटेक्चर म्यूजियम में शहर की पहली विजिटर्स बुक रखी गई है। इस बुक में नवंबर 1966 से लेकर नवंबर 2021 के बीच आए विभिन्न प्रतिनिधिमंडल की ओर से लिखे गए कोट्स मौजूद हैं। पांच अगस्त 1970 को इंग्लैंड के सुदरलैंड से एक प्रतिनिधिमंडल शहर पहुंचा। इसमें ब्रायन हैंडी भी शामिल थे। 

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उन्होंने लिखा कि चंडीगढ़ प्रशासन कैपिटल कांप्लेक्स को जल्द पूरा करे। वर्ष 1970 केआसपास तक कैपिटल कांप्लेक्स में ओपन हैंड, जियोमैट्रिक हिल और शहीदी स्मारक नहीं बना था, इसलिए वह काफी खाली लगता था। हालांकि, वर्ष 1985 में ओपन हैंड मॉन्यूमेंट बनाया गया। साल 2016 में जियोमैट्रिक हिल का काम पूरा हुआ, लेकिन अभी तक शहीदी स्मारक नहीं बन पाया है। ली कार्बूजिए सेंटर की निदेशक दीपिका गांधी ने कहा कि ज्यादातर शहरवासियों को कैपिटल कांप्लेक्स के महत्व का आभास नहीं है। कुछ देशों में रहने वाले लोगों का सपना होता है कि वह जीवन में एक बार चंडीगढ़ के कैपिटल कांप्लेक्स को जरूर देखें।

अमेरिकी चंडीगढ़ देख हुए थे हैरान, बोले- ये शहर हमारे लिए होगा चुनौती
अगस्त 1970 में अमेरिका के पेंसिलवेनिया से करीब 20 अमेरिकी शिक्षक चंडीगढ़ पहुंचे थे। उन्होंने पूरे शहर का दौरा किया और फिर विजिटर्स बुक में लिखा, जिस तरह का आर्किटेक्चर इस शहर का है, यह मॉडर्न अमेरिका के लिए एक चुनौती साबित होगा। नवंबर 1979 में जापान से आए प्रतिनिधिमंडल में से तोषिहिको इजिमा ने लिखा, वह अपना दिल इस शहर में ही छोड़कर जा रहे हैं। 14 दिसंबर 1981 को स्विट्जरलैंड से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को सलाह ही थी कि ये शहर खूबसूरत है, इसकी खूबसूरती को लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है।

जब आस्ट्रेलिया से आए लोगों ने कहा- मॉडल्स को साफ करें
विदेशियों को चंडीगढ़ शुरू से ही भाता रहा है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता जनसंख्या के साथ अव्यवस्थाएं भी बढ़ती गईं। वर्ष 1992 में आस्ट्रेलिया से एक डेलिगेशन आया तो पूरा शहर घूमने के बाद उसने लिखा-चंडीगढ़ को अपनी इमारतों को मेंटेन करने की जरूरत है। इसके साथ ही शहर के म्यूजियम में रखे गए मॉडल्स को भी साफ करना चाहिए। हालांकि, वह भी चंडीगढ़ के आर्किटेक्चर को देखकर हैरान हुए थे। किसी ने यूटी सचिवालय को आधुनिक मंदिर बताया तो किसी ने कहा कि उनका सपना पूरा हो गया।
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कैपिटल कांप्लेक्स में बनना था गवर्नर पैलेस
सेक्टर-एक स्थित कैपिटल कांप्लेक्स ली कार्बूजिए की ओर से डिजाइन किया गया एक यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है। यह लगभग 100 एकड़ जमीन क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें तीन इमारतें, तीन स्मारक और एक झील है। इनमें विधानसभा, सचिवालय, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, ओपन हैंड मान्यूमेंट, जियोमैट्रिक हिल और टॉवर ऑफ शैडोज शामिल हैं। हालांकि, ली कार्बूजिए ने कैपिटल कांप्लेक्स में गवर्नर पैलेस और शहीदी स्मारक बनाने का भी सपना देखा था। गवर्नर पैलेस का मॉडल भी तैयार किया गया था और ये ली कार्बूजिए सेंटर में मौजूद है। हालांकि, बाद में राजभवन सुखना लेक के पास बनाया गया। शहीदी स्मारक भी अभी बन ही रहा है।

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