अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में हिस्सा लेने विभिन्न देशों के 24 विदेशी मेहमान भी चंडीगढ़ पहुंचे थे। जर्मनी, इटली, रूस, फ्रांस, न्यूजीलैंड और कजाकिस्तान के इन मेहमानों ने योग प्रोटोकॉल में विभिन्न आसन किए। कार्यक्रम की भव्यता को देख सभी गदगद नजर आए। हर कोई कार्यक्रम के बाद सेल्फी और फोटो खिंचवाकर ऐतिहासिक लम्हों को कैद करने में लगा था। जर्मनी की ऐना ने बताया कि यह अतुलनीय अनुभव रहा। वह बहुत दिनों से इस कार्यक्रम में शामिल होने का इंतजार कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को एक नई पहचान दिलाई है।
हाथ मिलाकर दिया सम्मान
श्रीनगर में एक एक्सीडेंट के दौरान अपने अंग गवां चुके दिव्यांग जवान अनिल कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आकर उनसे मिले और उन्होंने हाथ भी मिलाया। यह पल वह कभी भूल नहीं पाएंगे। इस पल को बयां करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं। अनिल ने बताया कि वह मोहली के रिहेबलीटेशन सेंटर में पिछले डेढ़ महीने से योग की ट्रेनिंग कर रहे थे। योग से उन्हें काफी फायदा मिला है।
दिव्यांग जवान राजेंद्र सिंह ने जताया आभार
जम्मू में गाड़ी पलटने के कारण दिव्यांग हो चुके जवान राजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई पहल ने उनमें ऊर्जा भर दी है। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री से हाथ मिलाने का मौका मिलेगा। पहली बार दिव्यांग स्पेशल सेल को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का हिस्सा बनाने पर उनका आभार जताना चाहूंगा।
हरियाणा के मुख्यमंत्री और मंत्री ने भी किया योग
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, हरियाणा बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, कालका की विधायक लतिका शर्मा ने भी कैपिटल कॉम्प्लेक्स में योग किया। इसके अलावा आयुष मंत्रालय के सचिव एम सरीन ने भी योग किया। पंजाब और हरियाणा के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, ब्रह्माकुमारी की बहन शिवानी, प्रधानमंत्री मोदी के योग गुरु डॉ. एचआर नागेंद्र भी इस मौके पर मौजूद रहे।
रेडियो कार्ड से हुई एंट्री
रेडियो आई कार्ड से सभी प्रतिभागियों की एंट्री हुई। कार्ड को मोबाइल पर टच कर क्यूआर कोड के माध्यम से दी गई जानकारी को मैच कर लोगों की एंट्री हुई। बिना आई कार्ड के किसी को एंट्री नहीं दी गई। अंबाला के बच्चों को बिना आई कार्ड एंट्री नहीं दी गई। जिस कारण उन्हें कार्यक्रम में भाग लिए बिना ही वापस लौटना पड़ा।