शाम करीब छह बजे वह वहां से फ्री हुए। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार पूर्व अधिकारियों और उस समय के राज नेताओं के बैंक खातों से लेकर प्रॉपर्टी तक को भी खंगाला जाएगा। विजिलेंस अधिकारी इस केस को गंभीरता से ले रहे हैं। याद रहे कि राज्य में 2017 में कांग्रेस की सरकार आने के बाद इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ था।
पूछताछ के दौरान गुरिंदर सिंह ने दो पूर्व मंत्रियों, तीन पूर्व आईएएस अफसरों और कुछ इंजीनियरों के नाम लिए थे। उस समय उसकी तरफ से कहा गया था कि काम दिलाने, बिल पास करने और टेंडर के नियम व शर्तों को उसके मुताबिक बनाने आदि को लेकर इन सभी ने मोटी रकम हासिल की है। इसी बयान के आधार पर विजिलेंस ने इन अफसरों और संबंधित नेताओं से पूछताछ करनी थी लेकिन न तो तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और न ही उनके बाद मुख्यमंत्री बने चरणजीत सिंह चन्नी ने जांच की अनुमति दी।
विजिलेंस के सूत्रों के अनुसार ठेकेदार गुरिंदर सिंह को 2007 से लेकर 2016 तक 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा के काम अलॉट हुए थे। इसे लेकर उसने इन अफसरों, पूर्व मंत्रियों को पैसा दिया। गुरिंदर सिंह के बारे में कहा जाता है कि सिंचाई विभाग में नीचे से लेकर ऊपर तक अफसर भी उसकी पसंद के ही लगते थे। 2006 में 4.75 करोड़ रुपये की उसकी कंपनी मात्र 10 वर्ष में 300 करोड़ रुपये की हो गई।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर खुद को बताया था बेगुनाह
पता चला है कि पूर्व आईएएस अधिकारी काहन सिंह पन्नू ने कुछ समय पहले इस मामले में खुद को बेगुनाह बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की थी। साथ ही ही उन्हें एक चिट्टी भी लिखी थी। यह चिट्ठी भी विजिलेंस को सौंप दी गई है। इसकी भी पड़ताल की जा रही है। इसके अलावा विजिलेंस ने ठेकेदार की ओर से दिए गए बयान को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। क्योंकि जब ठेकेदार कुछ साल पहले गिरफ्तार किया गया था तो उसने अदालत में भी अधिकारियों और मंत्रियों के नाम बोल दिए थे।
राजनेताओं पर भी कसा जाएगा शिकंजा
विजिलेंस ब्यूरो अब इस घोटाले में राज नेताओं पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है। जल्द ही शिअद नेता व पूर्व सिंचाई मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों और जनमेजा सिंह सेखों को भी पूछताछ के लिए बुलाएगी। विजिलेंस ने पूछताछ की सारी तैयारी कर ली है। जल्द ही उन्हें सर्कुलर जारी करने की योजना है।