हरियाणा के डॉक्टरों को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने फर्स्ट क्लास ऑफिसर की पॉजीशन का तोहफा दिया है। डॉक्टर वेतन विसंगतियों से नाराज थे और हड़ताल पर जाने की बात कर रहे थे।
ऐसे में सीएम हुड्डा ने उनसे बातचीत की और बातचीत के बाद अपनी चार फरवरी की प्रस्तावित हड़ताल वापस ले ली है। मुख्यमंत्री ने उनकी कुछ मांगों को मानने का भरोसा दिया।
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन (एचसीएमएस) के प्रधान डॉ. कुलदीप सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. सतबीर सिंह और महासचिव डॉ. आशीष राणा ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ सब मांगों पर चर्चा हुई है। उन्होंने मांगें स्वीकार करने का भरोसा दिया है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया है कि अब एंट्री लेवल पर ही डॉक्टरों को प्रथम श्रेणी का अधिकारी माना जाएगा। इस समय द्वितीय श्रेणी का अफसर माना जाता है। इसके अलावा दूसरी और तीसरी एसीपी देने के लिए दो-दो साल की ग्रामीण सेवा की शर्त हटाने की मांग पर विचार का भरोसा दिया है।
जो डॉक्टर नए नियुक्त होते हैं, उन्हें वेतन करीब 45 हजार रुपये मिलता है, जबकि एनआरएचएम के तहत ठेके पर रखे जाने वाले डॉक्टरों को 50 हजार, विशेषज्ञों को 80 हजार से एक लाख 20 हजार रुपये तक दिया जा रहा है। इस वेतन विसंगति को दूर करने की मांग की गई है।
उधर, सरकारी प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि एसोसिएशन पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जनहित की असुविधा को देखते हुए चार फरवरी की हड़ताल न करने और भविष्य में हड़ताल पर न जाने का भरोसा दिया है।
मुख्यमंत्री ने उन्हें कहा है कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के लोगों को बेहतरीन और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों। इसके लिए डॉक्टरों की अहम भूमिका है।
इसलिए डॉक्टरी जैसे पेशे वाले लोगों को हड़ताल के बारे सोचना भी नहीं चाहिए, क्योंकि इससे रोगियों के साथ-साथ आम जनता को भी असुविधा होती है। सीएम ने कहा कि सरकार सदा ही कर्मचारियों की जायज मांगों को माना है।