जानकारी मिलने के बाद फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंची और दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। जब तक आग बुझाई गई तब तक गोदाम के कई टैग आग की चपेट में चुके थे। आग लगने की जानकारी मिलते ही जुलाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। हैफेड के गोदाम में 10 टैग लगाए गए हैं।
प्रत्येक टैग में गेहूं के 3200 कट्टे लगाए गए हैं। इसके अलावा भी गेहूं के टैग लगाए जा रहे थे। गोदाम में लगभग दो लाख गेहूं के कट्टों का स्टॉक था। लगभग सभी टैगों में कहीं कम तो कहीं ज्यादा आग लगी है। इससे सभी टैग को काफी नुकसान हुआ है। खाद्य एवं पूर्ति विभाग को इससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। आग कैसे लगी, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। मामले की जांच की जा रही है।
स्टॉक के आसपास नहीं बिजली के तार
गोदाम में जहां पर गेहूं के टैग लगाए गए हैं, उस तरफ बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। गोदाम के चारों कोनों पर लाइट की व्यवस्था है। इससे साफ है कि बिजली के शॉर्ट सर्किट से आग नहीं लगी है।
नुकसान का किया जा रहा आंकलन
हैफेड के इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि आग किस वजह से लगी है इसका पता नहीं लग पाया है, लेकिन गोदाम में सवा दो लाख बैग का स्टॉक रखा हुआ है। गोदाम में काम कर रहे मजदूरों ने ही आग की सूचना दी। फिलहाल आग बुझा दी गई है। मौके पर अधिकारी पहुंचे चुके हैं। आग से हुए नुकसान का जायजा लिया जा रहा है।
हैफेड के एक पूर्व डीएम ने बताया कि गेहूं को खराब होने से बचाने के लिए बारदाने में एक केमिकल लगाया जाता है। यदि इस बारदाने में नमी युक्त गेहूं डाला जाय तो इससे आग लगने का खतरा रहता है। कई बार इस प्रकार के हादसे हो चुके हैं। ज्यादा नमी युक्त गेहूं खुद भी आग लगने का कारण बन सकता है।
मामले की जांच की जाएगी
आग लगने का कोई ठोस कारण अभी तक सामने नहीं आया है। आग से काफी नुकसान हुआ है। हो सकता है किसी मजदूर ने बीड़ी पीकर फेंक दी हो और आग लग गई हो। मामले की जांच करवाई जाएगी। यदि इसमें किसी मजदूर या कर्मचारी का हाथ मिला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -कृष्ण श्योराण, डीएम हैफेड
सूचना मिलते ही जुलाना पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को बुलाकर आग पर काबू पाया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। -रामतीर्थ, थाना प्रभारी जुलाना।