इसी दौरान आग की लपटे दूर-दूर तक दिखाई देने लगी। काम करने वाले सभी मजदूर बाहर की तरफ भागे और उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। आसपास के लोग भी इकट्ठा हो गए। सभी आग पर काबू पाने में लग गए। इसी दौरान किसी ने इसकी जानकारी फायर ब्रिगेड को दी। उससे पहले राहुल कुमार ऊपर सो रहे चारों को जगाने के लिए चला गया। जब वह आने लगा तो आग ज्यादा फैल चुकी थी।
राहुल जान बचाते किसी तरह फैक्ट्री के सामने से दूसरी छत पर चला गया। ठेकेदार अशोक चौधरी और प्रदीप ने भी ऐसा ही किया। जल्दबाजी में सोनू भी निकल गया लेकिन नीरज की नींद नहीं टूटी। जब उसकी नींद खुली आग काफी फैल चुकी थी। नीरज ऊपर जाने की बजाय नीचे चला गया और आग से निकलते हुए वहीं बेहोश होकर गिर गया।
फायर कर्मचारी आग पर काबू पाते रहे लेकिन किसी को नीरज के बारे में कुछ पता नहीं था। जल्दबाजी में मजदूरों को भी नीरज की याद नहीं आई। करीब साढ़े तीन घंटे बाद जब आग कम हुई तो शव का पता चला। जिसके बाद पुलिस की मदद से शव को बाहर निकाला गया और सिविल अस्पताल भेजा गया। पहले तो मजदूर की पहचान करने की कोशिश की गई लेकिन किसी को मजदूर के बारे में कुछ पता नहीं था। जब अंदर सो रहे अन्य मजदूरों को बुलाया गया तो पता चला कि नीरज बाहर नहीं है। इसके बाद पता चला कि नीरज की ही मौत हुई है।