सरकार से लेकर अदालतें तक दिव्यांग बच्चों को शिक्षा मुहैया करवाने के लिए तमाम कोशिशें कर रही हैं। लेकिन पंजाब के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल इन कोशिशों पर पानी फेरने में लगे हुए हैं। शिक्षा विभाग को शिकायतें मिली हैं कि कई प्रिंसिपल दिव्यांग विद्यार्थियों को नौंवीं से बारहवीं कक्षा में दाखिला देते समय इनसे फीस और अन्य फंड के रूप में पैसे वसूल रहे हैं।
जबकि, राइट्स ऑफ पर्सन विद डिसेबिलिटी के तहत दिव्यांग विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा मुहैया करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। कानून के मुताबिक छह से आठ साल के दिव्यांग विद्यार्थियों को नजदीक के स्कूल या उनकी पसंद के स्पेशल स्कूल में मुफ्त शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है।
यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि 18 साल की आयु तक हर दिव्यांग विद्यार्थी को उपयुक्त वातावरण में मुफ्त शिक्षा दी जाए। सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त और ग्रांट हासिल करने वाली सभी शिक्षण संस्थाओं को दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करनी होगी। वे बिना किसी भेदभाव के उन्हें दाखिल करेंगी। साथ ही दूसरे बच्चों की तरह खेल व अन्य गतिविधियों के अवसर मुहैया कराएंगी। विभाग को यह भी शिकायतें मिली हैं कि दिव्यांग विद्यार्थियों से फीस वसूलने के साथ-साथ कई कई जगह प्रिंसिपल उन्हें पढ़ने से हतोत्साहित करते हैं।
वे दिव्यांगों को दाखिला नहीं देते उन्हें स्कूल आने से रोकते हैं। इसके बाद शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार ने सभी प्रिंसिपल को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। जिनमें कहा गया है कि नौवीं से बारहवीं कक्षा में किसी भी दिव्यांग से कोई फीस न ली जाए। उन्हें दाखिला देने से रोकना कानून जुर्म है। किसी भी दिव्यांग विद्यार्थी को पढ़ाई के प्रति हतोत्साहित न किया जाए।
स्कूल के बाहर लगाना होगा बोर्ड
हाईकोर्ट के निर्देश और राइट्स ऑफ पर्सन विद डिसेबिलिटी के मुताबिक हर स्कूल के बाहर एक बोर्ड लगाना जरूरी किया गया है। जिसमें दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में दी जा रही सहूलियतों का ब्योरा लिखना होगा।