शनिवार को तो पूरा शहर दस फीसदी एटीएम के सहारे रहा। इन एटीएम में भी कैश दोपहर बाद ही डाला गया जो कि मुश्किल से शाम तक चले। नोटबंदी से लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत एक दिसंबर से हो रही है।
इस महीने में दस दिन बीतने के बाद भी न तो कतारों में कोई कमी आई है और नहीं ही लोगों की दिक्कतों में। लोगों का कहना है कि इतने लाचार तो वो नौकरी छूट जाने या बेरोजगार होने पर भी नहीं होते। देर रात भी सेक्टर 17 में लंबी लंबी कतारें लगी रहीं।
नोटबंदी के आगे शायद ही कोई इतना मजबूर व लाचार होगा जितना कि आज एसबीआई के खाली पड़े एटीएम की लाइन में लगे शशिकांत है। शशिकांत की मजबूरी सुनकर आपकी आंखे भी भर आएंगी।
शनिवार सुबह सेक्टर 17 स्थित एसबीआई बैंक के एटीएम की लाइन में बिहार के गया के रहनेवाले शशिकांत बैचेन से खड़े एटीएम के चलने का इंतजार कर रहे थे। एटीएम दोपहर एक बजे तक पैसे नहीं डले थे।
लेकिन एटीएम के बाहर कतार में खड़े सैकड़ों लोगों को उम्मीद थी कि पैसा उसी एटीएम में आएगा। बैंक स्कावयर में दर्जनभर एटीएम थे लेकिन दोपहर तक पैसा किसी भी एटीएम में नहीं आया था। उन एटीएम के बाहर कोई लाइन भी नहीं थी। क्योंकि उनमें पैसा आने की किसी को कोई उम्मीद भी नहीं थी।