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शूटिंग खेलने से पिता ने किया था मना, चेयरमैन ने बोला तो की हां : सरबजोत

Sat, 12 Apr 2025 01:17 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
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चंडीगढ़। डीएवी काॅलेज-10 में आयोजित दीक्षांत समारोह में ओलंपियन शूटर सरबजोत सिंह डिग्री लेने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने काॅलेज के समय की यादों को साझा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें काॅलेज में वापस आकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कभी सोचा नहीं था, जिस काॅलेज से वह पढ़कर जा रहे हैं। उसी में उन्हें इतना सम्मान और प्यार मिलेगा।
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उन्होंने बताया कि वह अक्सर पेपर के बाद चंडीगढ़ में गेड़ी मारने निकल जाते थे। वह 2014 में अपने अंबाला एरिया के स्कूल से गर्मियों के कैंप में गए थे, तब उन्हें पहली बार शूटिंग का पता चला था। तभी उन्होंने शूटर बनने का मन बना लिया था लेकिन इसके लिए उन्हें अपने पिता की अनुमति लेनी थी। जब उन्होंने घर आकर पिता से पूछा तो उन्होंने साफ मना कर दिया, क्योंकि यह खेल खर्चीला है। इसके लिए जूते पिस्टल सब कुछ खुद से खरीदना पड़ता है। इसके बाद सरबजोत ने सोच लिया था कि वह किसी अन्य खेल में जाएंगे। उनके स्कूल चेयरमैन ने उनके पिता से बात की तो भी वह नाराज थे। तब चेयरमैन ने कहा कि एक बार प्रयास करके देखते हैं, अगर नहीं कर पाया तो जिस खेल में वह चाहें डाल सकते हैं। तब उनके पिता ने हां की। उसके बाद वह शूटिंग की तैयारी में जुट गए।
जिला स्तर की प्रतियोगिता में जब सरबजोत का पहली बार में रजत पदक आया तो उनके पिता को हौसला मिला। उसके बाद उन्होंने कभी सरबजोत को नहीं रोका। 2020 के बाद शूटिंग में काफी लोग आए हैं। पहले नेशनल के लिए आठ हजार एंट्री आती थी, अब 15-16 हजार एंट्री आ रही हैं। पहले जो नेशनल की ट्रेनिंग 10 दिन चलती थी, अब वह एक महीने तक चलती है।
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इस खेल में नहीं चलती सिफारिश

उन्होंने कहा कि यह ऐसा खेल है, जिसमें दूसरे पर जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। इसमें कोई सिफारिश नहीं की जा सकती। कोई धोखा नहीं किया जा सकता। इसमें खिलाड़ी की खुद की मेहनत है। उन्होंने कहा कि जिनकी भी रूचि है वह पिस्टल या राइफल शूटिंग में जरूर आएं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि अपने बच्चों को किसी न किसी खेल में डालें ताकि वह अपने माता पिता और देश का नाम रोशन कर सकें।
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