रमेश दलाल ने बताया कि किसानों को इस बात का डर है कि अधिकारी इस मामले में अपनी गलतियों को छुपाने के लिए किसानों के साथ न्याय नहीं करेंगे तथा नए संशोधित अवार्ड में भी किसानों को उनकी जमीन का मार्केट मूल्य के हिसाब से मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
अब किसानों के सब्र का बांध टूट चुका इसलिए वह सामूहिक आत्महत्या की अनुमति मांग रहे हैं। किसानों ने अपने पत्र में राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को लिखा है कि आत्महत्या के अलावा हमारे पास दूसरा और कोई रास्ता नहीं बचा है। कानून हमारे पक्ष में होने के बावजूद हम पिछले पांच महीने से सड़क पर बैठे हैं।
हम अपना अधिकार मांगते हैं तो सरकार अनसुना कर देती है। कानूनी अधिकार के लिए इन सरकारी अधिकारियों से भिड़ने की अब और ऊर्जा नहीं बची है। अधिकारियों के अहंकार के सामने हम हार गए लेकिन यह अकेली हमारी हार नहीं है यह देश के संविधान की हार है। निवेदन है कि हमें सामूहिक रूप से आत्महत्या की अनुमति दी जाए।
किसानों की मांग सरकार तक भेजी जा चुकी है। सरकार ने अवार्ड संशोधन की बात मानी है। इस मामले में एक सप्ताह में कोई फैसला आने की संभावना है। किसानों को चाहिए कि वे कानून व्यवस्था बना कर रखें। -डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।