पंजाब के फिरोजपुर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे गांव के किसानों ने इस बार गेहूं की फसल छोड़ सरसों की खेती करना शुरू कर दिया है। किसानों को एक एकड़ सरसों से लगभग 80 हजार रुपये की आमदनी हुई है। सरसों की बुआई में भी खर्च कम है। सरहद पट्टी के किसान सरसों की पैदावार अधिक होने पर खुश हैं। आधा या एक एकड़ में सरसों की खेती करने वाले किसान अगले साल 15 एकड़ में सरसों की खेती करने की बात कह रहे हैं।
सीमांत गांव गट्टी रहीमेके के किसान गुरदेव सिंह ने बताया कि गेहूं और धान की फसल में उन्हें फायदा कम नुकसान ज्यादा होता है, इसलिए उन्होंने सरसों की खेती करनी शुरू की। सरसों का जो बीज (कैनोला-7) बाजार में 1600 रुपये किलो है, यही बीज पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (लुधियाना) में 160 रुपये प्रति किलो है।
एक एकड़ में एक किलो बीज लगता है। इसमें ज्यादा पानी, कीटनाशक दवा व डीएपी खाद की जरूरत नहीं होती। एक एकड़ में किसान को लगभग 80 हजार रुपये की कमाई हो जाती है। बाजार में तकरीबन 7500 रुपये प्रति क्विंटल में सरसों बिक रहा है। गुरदेव ने कहा कि अगले साल 15 एकड़ में सरसों की खेती करेंगे। सरहदी इलाके में किसानों ने अपनी एक टीम गठित की है, जो गेहूं व धान की फसल को ज्यादा तवज्जो न देकर सरसों की खेती करेंगे। गुरदेव ने कहा कि अन्य किसान भी गेहूं व धान फसल छोड़ सरसों की तरफ ध्यान दें। इससे भूजल भी सुरक्षित रहेगा।
गांव भानेवाला के किसान मुख्तियार सिंह ने बताया कि डेढ़ एकड़ जमीन पर सरसों की बुआई की है। इससे उसे काफी लाभ हुआ है। जबकि एक एकड़ में गेहूं की बिजाई के लिए उन्हें आठ सौ रुपये की यूरिया, दो हजार रुपये का डीजल, 1250 रुपये की डीएपी खाद के अलावा बिजली व पानी की खपत करनी पड़ती है, उसके बाद भी उन्हें उतना फायदा नहीं होता जितना होना चाहिए है। सिंह ने कहा कि सरहद पट्टी के किसान गुरमीत सिंह, बलविंदर सिंह व अन्य किसानों ने सरसों फसल की बुआई की है। किसानों का कहना है कि वे अगले वर्ष अपनी जमीन के अलावा ठेके पर और जमीन लेकर सरसों की फसल की बिजाई ही करेंगे, ताकि आमदनी भी ज्यादा हो।