चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने किराया नहीं जमा कराने पर 115 स्मॉल फ्लैट्स को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्षों से किराया न देने पर सीएचबी ने वर्ष 2019 में इन मकानों का आवंटन रद्द कर दिया था, लेकिन कुछ महीनों बाद आए कोविड की वजह से इन्हें खाली नहीं कराया जा सका। आवंटियों ने भी अब तक किराया नहीं जमा किया है, इसलिए अब सीएचबी ने खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कई नोटिस देने के बाद भी किराया न जमा कराने पर सीएचबी ने 11641 लोगों को शोकॉज नोटिस भेजा है। इसमें सबसे ज्यादा धनास के आवंटी हैं। नोटिस में कहा गया है कि अगर 31 मार्च से पहले बकाया किराया जमा नहीं किया तो मकानों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सीएचबी के सीईओ यशपाल गर्ग ने कहा है कि इन आवंटियों को कई बार किराया जमा कराने के लिए कहा गया है, बावजूद इसके सभी पर करीब 50 करोड़ रुपये का किराया बकाया है। सबसे ज्यादा आवंटी धनास के हैं। पहले 23 मार्च तक का समय दिया गया था लेकिन बाद में समय सीमा को बढ़ाकर 31 मार्च कर कर दिया गया। इस दिन तक किराया जमा नहीं किया तो मकानों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। स्मॉल फ्लैट्स स्कीम के तहत उन आवंटियों को नोटिस भेजा गया है, जिन पर 10 हजार रुपये से ज्यादा का किराया बकाया है।
एक बार मकान रद्द हुआ तो झेलनी पड़ेगी परेशानी
सीएचबी के सीईओ यशपाल गर्ग ने कहा कि एक बार आवंटन रद्द हो गया तो उसमें रहने वाले आवंटी को मकान खाली करना होगा। अगर अपीलीय प्राधिकारी इसकी बहाली की अनुमति देता है तो आवंटी को सभी लंबित देय राशि, ब्याज और रिवाइवल शुल्क का भी भुगतान करना होगा। हालांकि सीएचबी के नोटिस के बाद कुछ लोगों ने किराया जमा किया है और मार्च महीने में 8 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं लेकिन ज्यादा संख्या में आवंटियों ने अभी भी किराया नहीं दिया है। ऐसे लोगों के खिलाफ 31 मार्च के बाद कार्रवाई शुरू की जाएगी।