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राजस्थान में सक्रिय टिड्डी दल,13 किमी. प्रति घंटे की गति से भर रहा उड़ान, किसान रहें अलर्ट

Mon, 01 Jun 2020 03:44 PM IST
ajay kumar विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)

सार

  • हरियाणा के सिरसा, हिसार, भिवानी व महेंद्रगढ़ का रेतीला एरिया टिड्डी दल के लिए माफिक 
  • कृषि विभाग ने सभी जिला कृषि अधिकारियों को पत्र भेजकर किया अलर्ट
  • अफ्रीका से खाड़ी देशों ईरान व पाकिस्तान होते आया राजस्थान में
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फाइल फोटो
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विस्तार
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अफ्रीका के रेगिस्तान व खाड़ी देशों से होते हुए पाकिस्तान के रास्ते राजस्थान आया टिड्डी दल हरियाणा के दक्षिण-पश्चिम सीमा पर दस्तक दे रहा है। 13 किलोमीटर प्रति घंटे की गति व 4 किलोमीटर के दायरे में एक साथ उड़ान भरने वाले टिड्डी दल से किसानों व प्रशासन को अलर्ट रहना जरूरी है। इसके लिए कृषि विभाग ने जिला स्तर पर अधिकारियों को पत्र भेजकर सतर्क रहने की हिदायत दी है।  

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विभाग के अधिकारियों के मुताबिक रेगिस्तानी टिड्डी ग्रास हॉपर से आकार में बड़ी होती हैं। ग्रास हॉपर जहां फूदक-फूदक कर उड़ता है, जबकि रेगिस्तानी टिड्डी लंबी दूरी की उड़ान भरती हैं। यह समूह में उड़ान भरती है और एक से दूसरे देश तक सफर करती हैं। एक समूह में टिड्डी की संख्या 1 करोड़ तक हो सकती है, जो दिन में तो सफर करती है। शाम के समय जिस पेड़ या फसल पर बैठती है, उसके पत्तों को चट कर देती है।


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बारिश के मौसम में रेतीली जमीन में अड्डे देती है टिड्डी 
एक्सपर्ट के मुताबिक टिड्डी दल के लिए प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल अवस्था बारिश के मौसम में नमी के दौरान रेतीली जमीन होती है। यह जमीन के अंदर अड्डे देती हैं। प्रजजन के समय 10 से 15 दिन तक अड्डा रहता है, जिससे औसतन 36 दिन में अव्यस्क टिड्डी बन जाती है। ढाई से 5 माह में टिड्डी को व्यस्क बनने में समय लगता है।

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21 दिन तक व्यस्क अवस्था रहती है। सर्दी के मौसम में टिड्डी का प्रजजन क्षेत्र पाकिस्तान- ईरान बार्डर, सऊदी अरब व मिस्र का एरिया रहता है, जबकि गर्मी के मौसम में राजस्थान से लगता पाकिस्तान का रेतीला क्षेत्र व अफ्रीकी क्षेत्र होता है। मौसम के हिसाब से टिड्डी दल न केवल प्रजनन करता है, बल्कि एरिया में सक्रिय भी रहता है। 

तीन तरह के उपाय से फसल का बचाव संभव 
  • टिड्डी दल खेत में नालियों के अंदर समूह के तौर पर एकत्रित होकर बैठता है। तत्काल मिट्टी डालकर उसे दबाया जा सकता है। 
  • ढोल, नगाड़े व पटाखों के शोर से इसे उड़ाया जा सकता है। 
  • कीटनाशक मीलाथीओन के छिड़काव से खत्म किया जा सकता है। 
  • हस्तचालित मशीन से प्रति घंटा एक हेक्टेयर
  • ट्रैक्टर के पीछे मशीन बांधकर पंप से प्रति घंटा 25 हेक्टेयर में छिड़काव। 
  • :मोटर युक्त मशीन से प्रति घंटा 40 हेक्टेयर में छिड़काव। 

राजस्थान से लगती सीमा में खतरा 
प्रदेश के जिले सिरसा, हिसार, भिवानी व महेंद्रगढ़ की सीमा पर राजस्थान का रेतीला एरिया लगता है। गुजरात के भुज से लेकर राजस्थान के चुरू जिले तक इसकी सबसे ज्यादा सक्रियता रहती है। कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि 1998 में भिवानी, हिसार, सिरसा व महेंद्रगढ़ जिले में टिड्डी दल का प्रकोप नजर आया था। अब पिछले दिनों टिड्डी दल सिरसा की राजस्थान से लगती सीमा तक आ गया था। हालांकि हवा का रुख बदलने से टिड्डी दल वापस राजस्थान की ओर चल गया। 
रेगिस्तानी टिड्डी ग्रास हॉपर से बड़ी होती है, जो न केवल लंबी दूरी तक उड़ान भरती है, बल्कि हरी दिखाई देनी वाली हर तरह की फसल, पेड़ व पौधों के पत्तों को खाती है। राजस्थान से लगते जिले सिरसा, हिसार, भिवानी व महेंदगढ़ में अलर्ट किया गया है। किसानों को भी टिड्डी पर कड़ी निगाह रखनी है, ताकि समय पर उससे बचाव हो सके।  - रोहताश सिंह, जिला कृषि विकास अधिकारी
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