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पीजीआई चंडीगढ़ में अंग प्रत्यारोपण की आस में हजारों मरीज... इंतजार में कट रहा एक-एक दिन

Mon, 01 Jun 2020 02:53 PM IST
खुशबू गोयल वीणा तिवारी, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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अंग प्रत्यारोपण पर रोक लगने के कारण हजारों मरीज इन दिनों जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इन मरीजों का एक-एक दिन बड़ी मुश्किल से गुजर रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देशभर में 26 मार्च को ऑर्गन ट्रांसप्लांट को लेकर राष्ट्रीय गाइडलाइन जारी की गई थी।
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इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल रूटीन ट्रांसप्लांट न किया जाए। इससे उनकी स्थिति और बिगड़ सकती है। इसके साथ ही ऐसे मरीजों को समय-समय पर उचित परामर्श देने के लिए टेलीमेडिसिन तकनीक के इस्तेमाल का निर्देश जारी किया गया।

लेकिन इन सबके बावजूद ऑर्गन ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीज और उनके परिजन काफी परेशान हैं क्योंकि काफी मशक्कत के बाद उन्हें पीजीआई में ट्रांसप्लांट की डेट मिली थी जो कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन से बढ़ती ही जा रही है।
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केस- 1: पंजाब निवासी हरजीत कौर की दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं। डॉक्टर ने 9 महीने पहले ही उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कह दिया था। तमाम कागजी कार्यवाही पूरी करने व डोनर की तलाश के बाद फरवरी में उन्हें पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट की डेट मिली। 25 मार्च को उनका किडनी ट्रांसप्लांट किया जाना था लेकिन उससे पहले ही 19 मार्च से देशभर में अंग प्रत्यारोपण पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया गया। अब हरजीत मार्च से एक-एक दिन इस इंतजार में गुजार रही हैं कि जल्द लॉकडाउन खत्म हो और वह किडनी ट्रांसप्लांट करवाकर डायलिसिस से मुक्ति पा सकें।    

केस- 2: हिमाचल प्रदेश के संदीप कुमार का लिवर बुरी तरह डैमेज हो चुका है। पीजीआई में 7 महीने से इलाज करवाने के दौरान डॉक्टर ने उन्हें लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी। पत्नी अपना लीवर देने के लिए राजी हो गई हैं। 5 मार्च को उन्होंने पीजीआई में आकर लिवर ट्रांसप्लांट की सारी कागजी कार्यवाही पूरी कर ली। उन्हें 27 मार्च की डेट मिली लेकिन उनका भी प्रत्यारोपण कोरोना और लॉकडाउन के चलते रुक गया। फिलहाल वह अपने लीवर की समस्या को झेलते हुए दवाओं के सहारे किसी तरह एक-एक दिन बड़ी मुश्किल से काट रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द से जल्द कोरोना नहीं खत्म हुआ और उनका लिवर ट्रांसप्लांट नहीं हुआ तो ये बीमारी उनका जान ले लेगी। 

2020 में महज तीन महीने में 57 लोगों का हुआ अंग प्रत्यारोपण

अंग प्रत्यारोपण के मरीजों के लिए 2020 काफी अच्छा साबित हो रहा था। पीजीआई में महज 3 महीने में 57 मरीजों को अंग प्रत्यारोपण से उन्हें जीवनदान मिल चुका है। इसमें जनवरी और फरवरी में कुल 44 मरीजों में अंग प्रत्यारोपण किया गया, जिनमें 40 किडनी, एक लिवर और तीन पैंक्रियाज के मरीज शामिल हैं। वहीं 1 मार्च से 19 मार्च के बीच 13 लोगों को अंगदान से नया जीवन मिला, जिसमें 12 किडनी के मरीज और एक पैंक्रियाज का मरीज शामिल है।  

इनको है लॉक डाउन खुलने का इंतजार  
अंग              मरीजों की वेटिंग लिस्ट  
किडनी          1980  
लिवर           52  
पैंक्रियाज        21  
हृदय              1  
कॉर्निया         2654 
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मौत के बाद कौन-कौन से अंग हो सकते हैं दान

डॉक्टरों के मुताबिक मौत के बाद अंगदान करके एक व्यक्ति कम से कम आठ लोगों की जान बचा सकता है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सभी अंग डोनेट किए जा सकते हैं। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। ब्रेन डेड मरीज की किडनी, लीवर, फेफड़ा, पैंक्रियाज, छोटी आंत, वॉयस बॉक्स, हाथ, यूट्रस, ओवरी, फेस, आंखें, मिडिल ईयर बोन, स्किन, बोन, कार्टिलेज, तंतु, धमनी व शिराएं, कोर्निया, हार्ट वाल्व, नर्व्स, अंगुलियां और अंगुठे दान किए जा सकते हैं।  

पीजीआई में अब तक इतने हुए अंगदान  
1996 से 19 मार्च 2020  तक की रिपोर्ट
किडनी- 422
लिवर- 76
हृदय - 15
पैंक्रियाज- 25
फेफड़ा- 2
कार्निया- 7969    

मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय स्तर पर इसकी गाइडलाइन जारी की गई है। अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए पीजीआई टेली कंसल्टेंट के जरिए लगातार उनका फॉलोअप कर रहा है। कोरोना पर नियंत्रण मिलते ही स्थिति पुन: सामान्य हो जाएगी।    
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
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