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Farmers Protest: सरकार का प्रस्ताव ठुकराने के बाद किसानों ने बताया आगे का प्लान; क्या बातचीत से निकल पाएगा हल?

Tue, 20 Feb 2024 02:11 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

अनुबंध की शर्त पर एमएसपी गारंटी का प्रस्ताव किसानों ने खारिज कर दिया है। अब किसान 21 फरवरी यानि कल 11 बजे दिल्ली कूच करेंगे। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि सरकार करार नहीं, एमएसपी की पूरी कानूनी गारंटी दे।
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Farmers Protest - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अपनी मांगों को लेकर पंजाब के किसान बॉर्डर पर डटे हुए हैं। पंजाब के किसानों को हरियाणा समेत अन्य राज्यों के किसानों का समर्थन मिलने लगा है। बॉर्डर पर किसानों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। इस बीच, सोमवार को किसान संगठनों की हुई बैठक में केंद्र सरकार की ओर से मसूर, उड़द, अरहर (तूर), मक्की और कपास की फसल पर अनुबंध की शर्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी का प्रस्ताव किसानों ने नामंजूर कर दिया है।
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किसानों ने अनब 21 फरवरी यानि कल सुबह 11 बजे दिल्ली कूच करने का एलान किया है। साथ ही कहा कि सरकार के साथ वार्ता जारी रखेंगे। किसानों के दिल्ली कूच के एलान के बाद बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बॉर्डर पर इंटरनेट पर पाबंदी अभी जारी है। किसानों सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 

ये बोले- किसान नेता
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने सोमवार शंभू बॉर्डर पर पत्रकार वार्ता में स्पष्ट तौर पर कहा कि केंद्र सरकार करार नहीं, एमएसपी की पूरी कानूनी गारंटी दे। इससे कम हमें कुछ भी मंजूर नहीं है। 
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डल्लेवाल ने कहा कि एमएसपी की कानूनी गारंटी के बदले केंद्रीय मंत्रियों की ओर से जो प्रस्ताव सामने आया है, वह हमारी मांगों की सहमति के मापदंडों पर बहुत दूर है। दरअसल, मंत्रियों ने किसान संगठनों को एमएसपी की नहीं, बल्कि खरीद के कॉन्ट्रैक्ट की गारंटी दी है। यानी करार के तहत सरकार की नोडल एजेंसियों के माध्यम से पांच साल के लिए फसलों की खरीद सुनिनिश्चत की जा रही है। पांच साल के बाद सरकार का अगला कदम क्या होगा, इस पर कोई प्लान नहीं है। 

किसानों की हैं तीन प्रमुख मांगें

डल्लेवाल ने कहा कि वह फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी के लिए किसी प्रकार के कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे। डल्लेवाल ने कहा कि सोमवार को उन्होंने सभी किसान संगठनों के साथ बातचीत की, लेकिन पांच फसलों पर पांच साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट वाले प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन पा रही। किसानों की तीन प्रमुख मांगें हैं। इनमें सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी और बिजली अधिनियम वापस लेना शामिल हैं।

पांच या सात साल के करार से प्रस्ताव से किसानों को कोई लाभ नहीं होगा, क्योंकि इस प्रस्ताव के साथ केंद्रीय मंत्रियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खरीद की कोई तय सीमा नहीं होगी। एमएसपी की कानूनी गारंटी पर अब तक केंद्रीय मंत्रियों और किसान संगठनों के बीच चंडीगढ़ में चार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन हल नहीं निकल पाया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान खुद तीन बार इस बैठक में शामिल हो चुके हैं।

हम सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार: पंधेर
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि प्रस्ताव में कुछ भी स्पष्ट नहीं है, हमारे कानूनी सलाहकारों तक का मानना है कि सरकार की नीयत में खोट है। पंधेर ने कहा हम सरकार के साथ बातचीत जारी रखेंगे। जब तक 23 फसलों पर एमएसपी कानूनी गारंटी का हल नहीं निकलता आंदोलन जारी रहेगा। दिल्ली कूच से पहले 21 को संयुक्त किसान मोर्चा की जनरल बॉडी की बैठक शंभू बॉर्डर पर होगी।

 

रविवार को किसानों के साथ हुई चौथे दौर की बैठक

इससे पहले रविवार रात को चौथे दौर की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने धान और गेहूं के अलावा पांच अन्य फसलों पर एमएसपी गारंटी का प्रस्ताव पेश किया था। इसके लिए किसानों को भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) और भारतीय कपास निगम (सीसीआई) से पांच साल का करार करना होगा। इससे पहले भी केंद्र और किसानों के बीच आठ, 12 और 15 फरवरी को भी बातचीत हुई थी। लेकिन अब तक हुई बैठकें बेनतीजा ही रही हैं। 
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ये हैं किसानों की प्रमुख मांगें

  • स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार सभी फसलों की एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
  • किसानों और खेत मजदूरों की कर्ज माफी की मांग
  • लखीमपुर खीरी में जान गंवाने वाले किसानों को इंसाफ और आशीष मिश्रा की जमानत रद्द कर सभी दोषियों को सजा की मांग
  • लखीमपुर खीरी कांड में घायल सभी किसानों को वादे के मुताबिक 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग
  • किसान आंदोलन के दौरान दर्ज केस रद्द करने की मांग
  • पिछले आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के आश्रितों को नौकरी
  • 200 दिन मनरेगा की दिहाड़ी मिले
  • 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की मांग
  • फसल बीमा सरकार खुद करे
  • किसान और मजदूर को 60 साल होने पर 10 हजार रुपये महीना मिले
  • विश्व व्यापार संगठन से खेती को बाहर किया जाए
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