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विश्व पार्किंसन दिवस: कीटनाशक के संपर्क में रहने वालों में पार्किंसन का खतरा अधिक, PGI के शोध में बड़ा खुलासा

Thu, 11 Apr 2024 12:38 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई में जिन पर शोध किया गया, उन 600 मरीजों में लगभग 70-80 प्रतिशत कृषि क्षेत्र से थे। उनमें मर्ज का असर व्यापक था। वहीं, देश के अन्य कोने से पंजीकृत मरीजों में भी यह एक समान पाया गया। इसलिए रसायन और कीटनाशक को इस मर्ज के लिए काफी हद तक जिम्मेदार माना जा रहा है। वहीं, जिन मरीजों को पहले सिर में चोट लगी चुकी थी उनमें भी इस मर्ज की तीव्रता सामान्य मरीजों की तुलना में ज्यादा पाई गई।
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Parkinson disease - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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खेती करने वाले लोगों में पार्किंसन का खतरा ज्यादा है। क्योंकि वे उस दौरान कीटनाशक और रसायन के संपर्क में ज्यादा होते हैं। इससे उनके न्यूरॉस पर दुष्प्रभाव पड़ता है। यह बात पीजीआई के न्यूरोलॉजी विभाग में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के क्लीनिक ट्रायल से साबित हुई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि जो भी लोग ऐसा काम करते हों जिसमें कीटनाशक और रसायन का संपर्क ज्यादा हो, वे बचाव को लेकर सजग रहें।

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पीजीआई के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. साहिल ने बताया कि इसे लेकर देशव्यापी शोध किया गया है। इसमें पीजीआई के 600 मरीजों समेत देशभर के 8 हजार मरीजों को शामिल किया गया। इसमें मरीजों के क्लीनिकल ट्रायल में यह बात सामने आई है।

फ्रिजिंग ऑफ गेट पर हो रहा काम

डॉ. साहिल ने बताया कि पार्किंसन के मरीज चलते-चलते रुक जाते हैं। इस स्थिति को फ्रिजिंग ऑफ गेट कहा जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए पीजीआई सीएसआईओ के साथ मिलकर काम कर रहा है। वहां के वैज्ञानिक ऐसे मरीजों लिए विशेष प्रकार के जूते बना रहे हैं जिसमें लगे सेंसर मरीज को फ्रिजिंग ऑफ गेट की स्थिति में सेंसर के जरिए मस्तिष्क को कंपन भेजने का काम करेंगे। उस सेंसर से सिग्नल मिलने पर मरीज को ब्रेन पुन: एक्टिव हो जाएगा। जल्द ही मरीजों को इसका लाभ मिलेगा।

पार्किंसन ऐसे लेता है चपेट में

पार्किंसन मूवमेंट संबंधी एक विकार है, जिसमें हाथ या पैर से दिमाग तक पहुंचने वाली नसें या तंत्रिका काम करने में असमर्थ हो जाती हैं। इसमें व्यक्ति का हाथ पैर से नियंत्रण बहुत कम हो जाता है। आमतौर पर जब दिमाग को संदेश देने वाला डोपामाइन का स्तर कम हो जाता है तब यह बीमारी होती है। वैसे इसके अन्य भी कारक जिम्मेदार हैं।

पार्किंसन के कुछ सामान्य लक्षण

  • इसके बढ़ने की दर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है।
  • हथेली, बाजू, पैर, जबड़े या सिर का कांपना
  • मांसपेशियों में अकड़न, जहां मांसपेशियां लंबे समय तक सिकुड़ी रहती हैं
  • गतिविधि में धीमापन
  • बिगड़ा हुआ संतुलन, जो कभी-कभी व्यक्ति के गिरने का कारण बनता है
  • अवसाद और भावनात्मक बदलाव

ये भी जानें

पार्किंसंन डिसीज के लक्षण अक्सर शरीर के एक तरफ या एक अंग से शुरू होते हैं। जैसे-जैसे यह रोग बढ़ता है वैसे-वैसे यह शरीर के ज्यादा से ज्यादा हिस्से को प्रभावित करने लगता है। जकड़न और कंपकंपी का अनुभव करने से पहले, रोगी को नींद की समस्या, कब्ज, सूंघने की क्षमता में कमी और पैरों में बेचैनी की समस्या भी हो सकती है।

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ये मरीज को देता है राहत
-चलने और बोलने में कठिनाई के लिए कुछ थैरेपी, जिसकी मदद से चलने और आवाज निकलने जैसी समस्या में राहत मिल सकती है।
-शरीर के समग्र स्वास्थ्य के लिए पोषक आहार
-मांसपेशियों को मजबूत, संतुलित और लचीला बनाने के लिए व्यायाम
-तनाव कम करने के लिए मसाज थैरेपी

मर्ज का खतरा इन्हें ज्यादा
- 50 साल से ज्यादा उम्र के लोग
- महिलाओं की तुलना में पुरुषों को
- पार्किंसन रोग के पारिवारिक इतिहास वाले लोग
- पोस्टमेनोपॉज महिलाएं जिनमें एस्ट्रोजन का स्तर बहुत कम हो
- विटामिन बी की कमी से पीड़ित
- जिन लोगों को सिर में चोट लगी है

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