किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब में डीसी कार्यालयों के बाहर धरनारत है। आंदोलन के 17वें दिन किसानों ने राज्यभर में चार विधायकों व पांच मंत्रियों के घरों के बाहर प्रदर्शन किया। अमृतसर में किसानों ने कैबिनेट मंत्री डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर का घेराव किया। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मांगपत्र सौंपा। प्रदर्शन में बढ़ी संख्या में महिलाएं और कृषि मजदूर भी शामिल थे।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू व महासचिव सरवन सिंह का कहना है कि तरनतारन से मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर, गुरदासपुर से मंत्री लालचंद कटारुचक के आवास समेत नौ जगहों पर मांग पत्र सौंपे गए हैं। इसके अलावा फिरोजपुर में मंत्री फौजा सिंह, होशियारपुर में मंत्री ब्रह्मशंकर जिम्पा, विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा, गोल्डी कांबोज, नरिंदरपाल सवाना, इंद्रजीत कौर मान व नौ विधायकों को मांग पत्र सौंपे हैं।
किसानों ने मांग की है कि पंजाब के गिरते भूजल पर एक पर्याप्त नीति बने। धान की फसल के बजाय कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहित किया जाए। सारी फसलों की सरकारी खरीद गारंटी की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा डॉ. स्वामीनाथन की रिपोर्ट के अनुसार फसलों के दाम दिए जाएं। मनरेगा के तहत मजदूरों को 365 दिन का रोजगार दिए जाए। इस दौरान किसान नेता कंधार सिंह, लखविंदर सिंह डाला, गुरदेव सिंह गग्गोमहल, कुलजीत सिंह काले घनूपुर, बीबी सुखविंदर कौर, हरजस कौर, गुरजीत कौर कोटला, रूपिंदर कौर अब्दाल और गुरमीत कौर खैड़े ने भी किसानों को संबोधित किया।
किसानों ने दी सरकार को चेतावनी.. जालंधर में लगेगा दिल्ली जैसा धरना
अपने हक लेकर रहेंगे, साढा हक ऐथे रख, पंजाब पुलिस मुर्दाबादा, पंजाब सरकार मुर्दाबाद, डीसीपी जसकरण सिंह मुर्दाबाद। ये नारे सोमवार को जालंधर में किसान जत्थेबंदी व लतीफपुरा के लोगों ने लगाए। इस विरोध का कारण लतीफपुरा में लोगों के घर ढहाने का था। पंजाब किसान यूनियन के सदस्यों व लतीफपुरा के लोगों ने डीसीपी जसकरण सिंह की तरफ इस्तेमाल की गई गलत शब्दावली के रोष में उनका पुतला भी फूंका।
किसानों ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनके घर नहीं बनाए जाते तो जालंधर में भी दिल्ली की तरह धरना लगाया जाएगा। किसानों का कहना है कि ऐथे वड्डे वड्डे सुखबीर बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह वरगे बोहड़ उखड़ गए, ऐह ता कल दे जवाक ने...किसानों ने कहा कि लोगों के बेघर करने के पीछे 300 करोड़ का घपला होने का अंदेशा है। जिस जगह से मकान तोड़े हैं वह 1.25 किला जमीन हैं। सरकारी रेट के हिसाब से इसकी 150 करोड़ रुपये कीमत बनती है। लोग इंप्रूवमेंट ट्रस्ट बनने से पहले 1947 के समय से यहां पर रह रहे हैं। ट्रस्ट 1975 में बनी है। इसके बाद भी इन लोगों को भू-माफिया के इशारे पर बेघर कर दिया गया है।