फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्ज का दंश: 3 किसान भाइयों को निगला, मां-बाप भी चल बसे

Thu, 12 May 2016 12:38 PM IST
भूपेंदर सिंह भाटिया/अमर उजाला, बठिंडा
विज्ञापन
पंजाब के किसान ने की सुसाइड - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बठिंडा से लगभग 10 किलोमीटर दूर गांव दुनेवाला के दर्शन सिंह एक संपन्न किसान थे। उनके पास 35 किले से ज्यादा जमीन थी। लगातार फसल खराब होने के कारण उनके तीन बेटों (दो अविवाहित) ने बारी-बारी से आत्महत्या कर ली। बेटों की मौत के गम में किसान दर्शन सिंह और उनकी पत्नी भी चल बसीं। अब परिवार में सिर्फ दर्शन के बड़े बेटे अलख सिंह की पत्नी कुलविंदर कौर बची हैं।
विज्ञापन


घर के सामने विशाल खेत उनकी संपन्नता को तो दर्शाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि उसे अपने दो नन्हें बच्चों को पालने के लिए मनरेगा में दिहाड़ी करनी पड़ रही है। मनरेगा में दिहाड़ी न मिलने पर घर में खाने के भी लाले पड़ जाते हैं। घर के बड़े बरामदे में लकड़ी से चलने वाले टूटे मिट्टी के चूल्हे घर की दुर्दशा खुद-ब-खुद बयां कर रहे थे। किसान की विधवा कुलविंदर कौर खेतों की ओर दूर तक इशारा करते हुए बताती हैं कि यह सारे खेत उनके परिवार के होने के बावजूद वह उनकी मालकिन नहीं हैं।

जब उनके पति और दोनों देवरों (गुरप्रीत और कुलप्रीत) ने पेस्टिसाइड पीकर जान दे दी थी तो उनके इलाज में भारी खर्च हुआ था। उस समय उनके रिश्तेदारों ने इलाज पर लगभग तीन लाख खर्च किया था। अब इस जमीन पर उनके रिश्तेदार खेती करते हैं। जब तक इलाज पर उनके द्वारा खर्च किए गए रुपयों की वसूली नहीं होती, तब तक इन खेतों में पैदा होने वाले अन्न का एक भी दाना उन्हें नहीं मिल सकता। कई बार उन्होंने रिश्तेदारों से अपने बच्चों की दुहाई देकर मदद मांगी, लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लगी।
विज्ञापन


अब कितने वर्षों तक यह खेत उनके कब्जे में रहेंगे या कभी इन खेतों पर उनका कब्जा होगा कि नहीं, यह उसे नहीं पता। गांव के पटवारी और अन्य अधिकारी भी पैसे वालों की ही सुनते हैं। मनरेगा में नियमित रूप से मजदूरी नहीं मिलती। खाली समय में उनके पास कोई चारा नहीं होता। रिश्तेदार कहते तो हैं कि उनके द्वारा खर्च किए गए रुपयों की वसूली के बाद उन्हें हक मिलेगा। खास बात यह है कि घर में खाने के लाले पड़े हुए हैं, जबकि बैंक के लगातार नोटिस पहुंच रहे हैं। कुलविंदर कहती हैं कि सरकार की ओर से मदद तो दूर अब बैंक के नोटिस और भय पैदा कर रहे हैं।

कनाडा के क्लब ने की मदद
किसान परिवार की रिपोर्ट पाने के बाद कनाडा के एक क्लब ने परिवार को आर्थिक मदद की पेशकश की है। कुलविंदर कौर के अनुसार क्लब ने उन्हें 50 हजार रुपये तत्काल भेजे थे। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की बात कही है। उन्होंने बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलवाने को कहा है। क्लब की ओर से भेजे गए 50 हजार रुपये में से उन्होंने एक भैंस खरीदी है। शेष रुपयों से घर का मरम्मत कार्य करवाया है। अब उनकी उम्मीद क्लब पर टिकी है। क्लब के सदस्य उनसे लगातार फोन पर संपर्क में हैं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें