किसान नेता बलदेव सिंह, दर्शनपाल, राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी, तजेंद्र विर्क ने कहा कि वह प्रस्ताव को खारिज करते हैं। यह प्रस्ताव बताता है कि सरकार की मंशा किसानों की मांग पूरी करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने के साथ ही तीनों नए कानून रद्द करने से कम किसी शर्त पर बातचीत को तैयार नहीं है।
अब सरकार ने बातचीत के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। फिर भी अगर सरकार कानून रद्द करने और एमएसपी गारंटी का प्रस्ताव देती है तो किसान विचार कर सकते हैं। तब तक किसानों का यह आंदोलन चलता रहेगा और इसे तेज किया जाएगा। कहा कि किसान दिल्ली कूच भी कर सकते हैं, लेकिन यह किसानों की बैठक में सहमति से तय होगा।
भाजपा मंत्रियों का घेराव करेंगे, दिल्ली पर दबाव बढ़ाएंगे
किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि भाजपा के मंत्रियों का घेराव भी करेंगे और दिल्ली पर दबाव बढ़ाया जाएगा। दिल्ली में जाने वाले सारे नेशनल हाईवे अगले कुछ दिनों में जाम कर दिए जाएंगे। 12 दिसंबर तक का समय जयपुर-दिल्ली हाईवे को जाम करने के लिए तय किया गया है। इससे पहले ही इस नेशनल हाईवे को जाम कराया जाएगा। इस तरह से दिल्ली पर दबाव बढ़ाने की तैयारी हो गई है।
किसानों ने तीन प्रमुख प्रस्ताव पास किए हैं। इनमें सबसे पहले 12 दिसंबर को देशभर में टोल फ्री किया जाएगा। 12 तक हर हाल में जयपुर-दिल्ली हाईवे को भी रोका जाएगा। दूसरा कोई भी किसान या उनका परिवार एक कारपोरेट कंपनी का मोबाइल सिम इस्तेमाल करते हैं, उनसे उसे पोर्ट कराने का आह्वान किया गया है। तीसरा 14 दिसंबर को देशभर में धरना प्रदर्शन किया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि अब मुख्य आंदोलन सिंघु बॉर्डर से चलेगा और यहीं से अगली रणनीति तैयार होगी।
यह भेजे थे प्रस्ताव
- किसानों की मांग है कि कृषि सुधार कानूनों को रद्द करें। जिस पर सरकार ने प्रस्ताव दिया कि एतराज हैं तो विचार करने को तैयार हैं।
- किसानों की मांग है कि एमएसपी पर चिंताएं है। फसलों का कारोबार निजी हाथों में चला जाएगा। गारंटी कानून बने। जिस पर सरकार ने प्रस्ताव दिया कि सरकार लिखित आश्वासन देने को तैयार हैं।
- किसानों को शंका है कि नए कानून से उनकी जमीन पर पूंजीपतियों का कब्जा हो जाएगा। इस पर सरकार ने साफ किया कि किसान की जमीन पर कोई ढांचा भी नहीं बनाया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो मलकियत किसान की ही रहेगी।
- किसानों की मांग है कि बिजली विधेयक 2020 वापस लिया जाए। इस पर सरकार ने बताया कि यह विधेयक अभी चर्चा के लिए है और डीबीटी के संदर्भ में प्रस्तावित है कि संबंधित राज्य सरकार अग्रिम तौर पर लाभ सीधा उपभोक्ता के खाते में डालेगी। सरकार ने यह कहा कि इससे किसान की वर्तमान बिल भुगतान की व्यवस्था पर कोई असर नहीं पडे़गा।