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किसानों ने सरकार का प्रस्ताव किया नामंजूर, 12 दिसंबर को टोल फ्री करेंगे, 14 को देशभर में प्रदर्शन

Wed, 09 Dec 2020 02:54 PM IST
निवेदिता शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)

सार

  • भाजपा मंत्रियों का घेराव होगा, 12 दिसंबर तक जयपुर-दिल्ली हाईवे रोका जाएगा, दिल्ली से जुड़े सभी हाईवे करेंगे जाम 
  • कृषि कानून रद्द कराने को अड़े किसान, देशभर में आंदोलन को तेज करने की चेतावनी, दोबारा प्रस्ताव आने पर करेंगे विचार
  • गृह मंत्री से बैठक में बातचीत के अनुसार किसानों को भेजा था 19 पेज का प्रस्ताव, किसान संगठनों ने मानने से इंकार किया
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किसानों को मिला केंद्र सरकार का मसौदा। - फोटो : ANI
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विस्तार
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किसान प्रतिनिधियों की गृहमंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद बुधवार को सिंघु बॉर्डर पर भेजे प्रस्ताव को किसानों ने मानने से इंकार कर दिया। साथ ही 12 दिसंबर को टोल प्लाजा फ्री करने और 14 दिसंबर को देशभर में धरना-प्रदर्शन करने का एलान किया। दिल्ली-जयपुर हाईवे भी 12 दिसंबर तक बंद किया जाएगा और दिल्ली से जुड़ने वाले जितने हाईवे खुले हैं उन्हें भी जल्द बंद करने की बात कही। 

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किसानों ने साफ कहा कि वह केवल कृषि कानून को रद्द कराना चाहते हैं और जब तक ऐसा नहीं होता है, देश में आंदोलन तेज होता जाएगा। किसानों ने एक कारपोरेट कंपनी के मोबाइल सिम भी पोर्ट कराने का आह्वान किया। भारत बंद के बाद मंगलवार रात गृहमंत्री अमित शाह के बुलावे पर किसानों का 13 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा था।

वहां बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला और किसानों ने सरकार की मांग मानने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद उनको कहा था कि वह लिखित में प्रस्ताव किसानों के पास भेजेंगे। बैठक में बातचीत के अनुसार बुधवार दोपहर में किसानों के पास सरकार का 19 पेज का प्रस्ताव पहुंचा। प्रस्ताव को पढ़ने के बाद सभी किसान संगठनों ने बैठक की और घंटों चर्चा करने के बाद प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। 

 
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किसान नेता बलदेव सिंह, दर्शनपाल, राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी, तजेंद्र विर्क ने कहा कि वह प्रस्ताव को खारिज करते हैं। यह प्रस्ताव बताता है कि सरकार की मंशा किसानों की मांग पूरी करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने के साथ ही तीनों नए कानून रद्द करने से कम किसी शर्त पर बातचीत को तैयार नहीं है। 

अब सरकार ने बातचीत के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। फिर भी अगर सरकार कानून रद्द करने और एमएसपी गारंटी का प्रस्ताव देती है तो किसान विचार कर सकते हैं। तब तक किसानों का यह आंदोलन चलता रहेगा और इसे तेज किया जाएगा। कहा कि किसान दिल्ली कूच भी कर सकते हैं, लेकिन यह किसानों की बैठक में सहमति से तय होगा। 

भाजपा मंत्रियों का घेराव करेंगे, दिल्ली पर दबाव बढ़ाएंगे
किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि भाजपा के मंत्रियों का घेराव भी करेंगे और दिल्ली पर दबाव बढ़ाया जाएगा। दिल्ली में जाने वाले सारे नेशनल हाईवे अगले कुछ दिनों में जाम कर दिए जाएंगे। 12 दिसंबर तक का समय जयपुर-दिल्ली हाईवे को जाम करने के लिए तय किया गया है। इससे पहले ही इस नेशनल हाईवे को जाम कराया जाएगा। इस तरह से दिल्ली पर दबाव बढ़ाने की तैयारी हो गई है। 

किसानों की बैठक में तीन प्रस्ताव पास हुए, सिंघु बॉर्डर से चलेगा आंदोलन 

किसानों ने तीन प्रमुख प्रस्ताव पास किए हैं। इनमें सबसे पहले 12 दिसंबर को देशभर में टोल फ्री किया जाएगा। 12 तक हर हाल में जयपुर-दिल्ली हाईवे को भी रोका जाएगा। दूसरा कोई भी किसान या उनका परिवार एक कारपोरेट कंपनी का मोबाइल सिम इस्तेमाल करते हैं, उनसे उसे पोर्ट कराने का आह्वान किया गया है। तीसरा 14 दिसंबर को देशभर में धरना प्रदर्शन किया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि अब मुख्य आंदोलन सिंघु बॉर्डर से चलेगा और यहीं से अगली रणनीति तैयार होगी। 

यह भेजे थे प्रस्ताव
  • किसानों की मांग है कि कृषि सुधार कानूनों को रद्द करें। जिस पर सरकार ने प्रस्ताव दिया कि एतराज हैं तो विचार करने को तैयार हैं। 
  • किसानों की मांग है कि एमएसपी पर चिंताएं है। फसलों का कारोबार निजी हाथों में चला जाएगा। गारंटी कानून बने। जिस पर सरकार ने प्रस्ताव दिया कि सरकार लिखित आश्वासन देने को तैयार हैं। 
  • किसानों को शंका है कि नए कानून से उनकी जमीन पर पूंजीपतियों का कब्जा हो जाएगा। इस पर सरकार ने साफ किया कि किसान की जमीन पर कोई ढांचा भी नहीं बनाया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो मलकियत किसान की ही रहेगी।
  • किसानों की मांग है कि बिजली विधेयक 2020 वापस लिया जाए। इस पर सरकार ने बताया कि यह विधेयक अभी चर्चा के लिए है और डीबीटी के संदर्भ में प्रस्तावित है कि संबंधित राज्य सरकार अग्रिम तौर पर लाभ सीधा उपभोक्ता के खाते में डालेगी। सरकार ने यह कहा कि इससे किसान की वर्तमान बिल भुगतान की व्यवस्था पर कोई असर नहीं पडे़गा। 
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  • किसानों का कहना था कि कृषि कानून से एपीएमसी मंडियां कमजोर हो जाएंगी। किसान प्राइवेट मंडी के चंगुल में फंस जाएगा। सरकार ने जवाब दिया कि राज्य सरकार प्राइवेट मंडियों का पंजीकरण कर सके और उनसे सेस वसूल सके, ऐसी व्यवस्था करेंगे। 
  • किसानों ने संदेह जताया था कि भविष्य में उनकी जमीन की कुर्की हो सकती है। इस पर सरकार ने कहा कि वसूली के लिए कुर्की नहीं होगी, फिर भी सफाई देंगे। 
  • किसानों ने कहा था कि कानून के बाद किसान सिविल कोर्ट में नहीं जा सकते। सरकार ने कहा कि यह विकल्प दे सकते हैं। 
  • किसानों ने आशंका जताई थी कि पैन कार्ड दिखाकर यदि फसल खरीद होगी तो धोखा भी संभव है। सरकार ने जवाब दिया है कि राज्य सरकारें फसल खरीदने वालों के लिए पंजीकरण कर सकेंगे। 
  • किसानों ने पराली जलाने वाले कानून में सजा के प्रावधान पर ऐतराज जताया था। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि किसानों की आपत्तियों को दूर किया जा सकता है। 
  • किसानों ने कहा था कि एग्रीकल्चर एग्रीमेंट की व्यवस्था कानून में नहीं है। इस पर सरकार ने बताया कि एग्रीमेंट होने के 30 दिन के भीतर एसडीएम दफ्तर में कॉपी जमा कराने की व्यवस्था करेंगे।
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