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हरियाणा में व्यापक रहा भारत बंद, मंडियों व बाजारों में ताले, हाईवे पर किसानों ने लगाया जाम

Wed, 09 Dec 2020 01:59 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार/रोहतक/करनाल (हरियाणा)

सार

  • हिसार, सिरसा, फतेहाबाद में बंद रहे बाजार, महेंद्रगढ़, नारनौल और रेवाड़ी में आंशिक बंदी
  • बहादुरगढ़ में टीकरी बॉर्डर पर तीन शिविरों में आंदोलनरत किसानों ने किया रक्तदान 
  • कृषि कानूनों के विरोध में सिंघु बॉर्डर पर शाम को महिलाओं ने निकाला मशाल जुलूस
  • कैथल में किसानों को संबोधित करने पहुंचे रणदीप सुरजेवाला को प्रदर्शनकारियों ने लौटाया
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अंबाला में भारत बंद के समर्थन में प्रदर्शन करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत बंद का रोहतक, हिसार, सोनीपत, भिवानी, सिरसा, कैथल, करनाल, पानीपत, अंबाला जिलों में व्यापक असर दिखा। अधिकांश बाजार, मंडियां, पेट्रोल पंप, बसें और दुकानें बंद रहीं। जाम के कारण पुलिस ने कई जगह रूट डायवर्ट किए। इस दौरान एंबुलेंस और शादी की गाड़ियों को कहीं नहीं रोका गया। 

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हिसार, जींद, भिवानी, झज्जर, पानीपत, सोनीपत और दिल्ली मार्ग पर किसानों ने जाम लगाया। धरना-प्रदर्शन के साथ ही सड़कों पर जाम लगाया। अनाज मंडियां बंद रहीं, हालांकि सब्जी मंडियों पर बंदी का ज्यादा असर नहीं दिखा। कैथल में चंडीगढ़-हिसार मार्ग पर किसानों ने जाम लगाया। वहीं, तितरम मोड़ पर संबोधित करने पहुंचे कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला को किसानों ने लौटा दिया। सीएम सिटी करनाल में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और किसानों के ट्रैक्टर दौड़ते नजर आए।  

कहीं मशाल जुलूस तो कहीं रक्तदान शिविर
बंद के दौरान कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार शाम सिंघु बॉर्डर पर महिलाओं ने मशाल जुलूस निकाला। महिलाओं ने कहा कि वह कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के साथ है। सरकार की ओर से कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। जब तक सरकार इन कानूनों को रद्द नहीं करती, तब तक वह धरने से भी नहीं हटेंगी। बंद के दौरान बहादुरगढ़ में टीकरी बार्डर से लेकर सेक्टर-9 मोड़ तक तीन स्थानों पर रक्तदान शिविर लगाए गए। शिविरों में आंदोलनरत किसानों ने रक्तदान किया और कहा कि वे खून का हर कतरा देने को तैयार हैं, बस सरकार उनकी मांगें मान ले। 
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उद्योग और व्यापार जगत को 2000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

किसान आंदोलन का उद्योग और व्यापार पर व्यापक असर पड़ा है। आंदोलन शुरू होने से अब तक 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। औद्योगिक क्षेत्रों में माल नहीं आने-जाने से नुकसान लगातार बढ़ रहा है। अकेले सोनीपत में लगभग 1950 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। आंदोलन का केंद्र कुंडली होने के कारण सबसे ज्यादा प्रभाव वहां पड़ रहा है।  

दो आंदोलनकारियों की मौत
सोनीपत के कुंडली बार्डर पर एक प्रदर्शनकारी किसान की हार्ट अटैक से मौत हो गई। जींद के उझाना गांव में धरना दे रहे किसान की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। केएमपी, केजीपी व नेशनल हाईवे-44, 11 पर किसानों ने जाम लगाया।

वार्ता से ही निकलेगा कोई समाधान, दबाव से नहीं होता काम : मनोहर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कई दौर की बातचीत में ये बात साफ हो गई है कि ज्यादातर किसान संगठन कानूनों में संशोधन पर सहमत हैं लेकिन कुछ किसान संगठन कानून वापस लेने पर अड़े हैं। 

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में दबाव से काम नहीं होता है। साथ ही भरोसा दिलाया कि सरकार वही फैसला करेगी जो किसानों के हित में होगा, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि किसान की आय दो गुना होनी चाहिए। आंदोलन के समर्थन में पुरस्कार वापसी के संबंध में किए सवाल पर उन्होंने कहा कि सम्मान व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्र के नाम दिए जाते हैं, इसलिए ऐसा करना अच्छी बात नहीं है। अगर कोई ऐसा करता है तो यह उनकी व्यक्तिगत सोच है। 

एक दिन पहले कार्यक्रम स्थल पर टेंट उखाड़ने के बाद मनोहर नहीं गए पाढ़ा, सवाल पर साधी चुप्पी
गांव पाढ़ा में प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल पर सोमवार रात किसानों द्वारा टेंट उखाड़ने के सवाल पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल चुप्पी साध गए। हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि गांव पाढ़ा जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। मुख्यमंत्री यहां स्मार्ट एजुकेशन प्रोजेक्ट की शुरुआत के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।  
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