किसान आंदोलन का उद्योग और व्यापार पर व्यापक असर पड़ा है। आंदोलन शुरू होने से अब तक 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। औद्योगिक क्षेत्रों में माल नहीं आने-जाने से नुकसान लगातार बढ़ रहा है। अकेले सोनीपत में लगभग 1950 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। आंदोलन का केंद्र कुंडली होने के कारण सबसे ज्यादा प्रभाव वहां पड़ रहा है।
दो आंदोलनकारियों की मौत
सोनीपत के कुंडली बार्डर पर एक प्रदर्शनकारी किसान की हार्ट अटैक से मौत हो गई। जींद के उझाना गांव में धरना दे रहे किसान की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। केएमपी, केजीपी व नेशनल हाईवे-44, 11 पर किसानों ने जाम लगाया।
वार्ता से ही निकलेगा कोई समाधान, दबाव से नहीं होता काम : मनोहर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कई दौर की बातचीत में ये बात साफ हो गई है कि ज्यादातर किसान संगठन कानूनों में संशोधन पर सहमत हैं लेकिन कुछ किसान संगठन कानून वापस लेने पर अड़े हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में दबाव से काम नहीं होता है। साथ ही भरोसा दिलाया कि सरकार वही फैसला करेगी जो किसानों के हित में होगा, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि किसान की आय दो गुना होनी चाहिए। आंदोलन के समर्थन में पुरस्कार वापसी के संबंध में किए सवाल पर उन्होंने कहा कि सम्मान व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्र के नाम दिए जाते हैं, इसलिए ऐसा करना अच्छी बात नहीं है। अगर कोई ऐसा करता है तो यह उनकी व्यक्तिगत सोच है।
एक दिन पहले कार्यक्रम स्थल पर टेंट उखाड़ने के बाद मनोहर नहीं गए पाढ़ा, सवाल पर साधी चुप्पी
गांव पाढ़ा में प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल पर सोमवार रात किसानों द्वारा टेंट उखाड़ने के सवाल पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल चुप्पी साध गए। हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि गांव पाढ़ा जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। मुख्यमंत्री यहां स्मार्ट एजुकेशन प्रोजेक्ट की शुरुआत के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।