भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा उन्हें कल निकालता आज निकाल दे, लेकिन वह मिशन पंजाब के स्टैंड पर कायम हैं। वैसे बुधवार को उनका सात दिन का सस्पेंशन खत्म हो चुका है और मोर्चे ने उनको शाम को बुलाया है। फिर मोर्चा जो भी फैसला ले, वह स्वतंत्र है। अगर उन्हें मोर्चा से निकाल भी दिया गया तो भी वे मोर्चे के लिए और किसान आंदोलन के लिए काम करते रहेंगे। वह बुधवार को चंडीगढ़ सेक्टर 29 स्थित देश सेवक भवन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
चढ़ूनी ने ये भी साफ किया है कि मिशन पंजाब के बाद आंदोलन की गतिविधि कम नहीं होगी, बल्कि यकीनन आंदोलन को भी गति मिलेगी। वहीं, गुरुवार को संसद कूच को लेकर भाकियू नेता ने कहा कि कुल 200 लोगों को बुलाया है, हमसे पांच लोगों के नाम मांगे गए थे, जो दे दिए गए हैं। वह खुद भी मौजूद रहेंगे। हम शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और तोड़फोड़ आदि को समर्थन नहीं करते हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं पंजाब के लोगों को जागरूक करने आया हूं कि वह अपनी लड़ाई खुद लड़ें, लेकिन यदि कोई जिम्मेदारी दी जाएगी तो वे पंजाब के लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं।
पंजाब के लोग नई पार्टी बनाएं
पंजाब मिशन ही क्यों के सवाल पर भाकियू नेता ने कहा कि पंजाब से किसान आंदोलन में 500 से अधिक लोग शहीद हो चुके हैं। यहां तीनों पार्टियों से जनता तंग हैं, इसलिए पंजाब के हर आम किसान, मजदूर और दलितों समेत बुद्धिजीवी लोगों को एकजुट होकर आगे आकर राजनीति में हिस्सा लेना होगा। अगर जरूरत पड़े तो नई पार्टी भी बनाएं। ताकि पंजाब को रोल मॉडल के तौर पर पेश किया जा सके। चढ़ूनी ने कहा कि चौधरी छोटूराम से लेकर बाबा साहेब आंबेडकर ने राजनीति में हिस्सा लेकर किसान मजदूरों की लड़ाई लड़ी और उनको अधिकार दिलाए।
राकेश टिकैत पर साधा निशाना
चढू़नी ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा एक है, लेकिन विचारधारा अलग-अलग है। मोर्चा यूपी में भाजपा को हराना चाहता है, हम भी चाहते हैं, लेकिन वहां हम सरकार बनाने की बात नहीं कर सकते। राकेश टिकैत का नाम लिए बगैर निशाना साधते हुए चढ़ूनी ने कहा कि न तो उत्तर प्रदेश में कोई टोल बंद हुआ न कोई सड़क जाम हुई और न ही किसी नेता का घेराव हुआ।
हराने का प्रयोग हरियाणा पहले कर चुका
उदाहरण देकर चढ़ूनी ने कहा कि पार्टियों को हराने का जो तरीका मोर्चा अपना रहा है, वह हरियाणा में कई साल पहले हो चुका है। पहले बंसीलाल, फिर भजन लाल और फिर ओमप्रकाश चौटाला की सरकार किसानों ने हराई, लेकिन समस्याएं भी वैसी हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि सरकार में फैसला लेने वालों में किसान समेत आम आदमी हो।
संयुक्त मोर्चा के नेता भी लड़ते रहे हैं चुनाव
चढ़ूनी ने कहा कि किसान मोर्चा राजनीति के मुद्दे पर उनसे इतना नाराज नहीं है, क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चा में 11 कामरेड संगठन हैं, जिनके नुमाइंदे अक्सर चुनाव लड़ते हैं। संयुक्त मोर्चा में शामिल हन्ना मुल्ला कई बार सांसद रह चुके हैं। ऐसे में उनको राजनीति से कोई नफरत नहीं है और राजनीतिक ताकत के लिए मिशन पंजाब जरूरी है। फिलहाल पंजाब के लोगों के साथ संवाद शुरू किया है। बाद में मिशन यूपी पर काम करेंगे।
यूटी प्रशासन हटाए धारा 144, नहीं तो करेंगे विरोध
गुरनाम सिंह चढूनी ने चंडीगढ़ प्रशासन को भी सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में धारा 144 लगाई गई है, यदि उसके तहत किसान आंदोलन के समर्थन में चौक चौराहों पर झंडे लेकर खड़े होने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई तो किसान संगठन विरोध में आकर डट जाएंगे।