उसके बाद बड़ी मात्रा में ट्रेडिंग के नाम पर चावल दूसरे प्रदेशों से मंगवा लिया जाता है। यह धान खरीद के बदले बाद में सीधा सरकार को देते हैं। चालू सीजन में इस प्रकार के कई ट्रक किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने पकड़े थे। इसका सीधा नुकसान सरकार व किसान को होता है। शैलर मिल मालिक धान खरीद का अपना कोटा पूरा दिखाता है व किसान का धान मंडियों में पड़ा रहता है। जिससे किसान को धान फसल पर कट के रूप में 250-300 रुपये प्रति क्विंटल कम एमएसपी मिलता है।
राइस मिल शेलर्स लगा रहे सरकार को चूना
राकेश बैंस ने कहा कि शैलर्स सरकार को भी चूना लगाते हैं। न धान मंडी में आया न धान की कोई मिलिंग हुई न अन्य कोई खर्च हुआ, दूसरे प्रदेशों से मंगवाकर चावल सीधा सरकार को दे दिया और पूरे खर्चे वसूल कर लिए।
बाहर का गेहूं खरीदा, राज्य के किसान हुए परेशान
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने बताया कि पिछले साल पड़ोसी प्रदेशों के किसानों के नाम पर भारी मात्रा में गेहूं भी हरियाणा की मंडियों में बेची गई, जबकि मूल किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। भाकियू ने सीएम मनोहर लाल, कृषि मंत्री ओपी धनखड़ व खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री कर्ण देव कांबोज से फसल का भुगतान सीधा खाते में कराने की मांग की है।