आखिर वही हुआ, जिसके कयास लगाए जा रहे थे। भाजपा ने मेयर प्रत्याशी के लिए पार्षद राजेश कालिया का नाम फाइनल किया और पार्षद सतीश कैंथ ने बगावत कर दी। पार्टी ने जब कालिया के नाम की घोषणा की, तब तक किसी को खबर नहीं थी कि कैंथ पार्टी लाइन से किनारा कर लेंगे। इसका खुलासा तब हुआ, जब कैंथ नामांकन भरने के लिए नगर निगम के दफ्तर पहुंचे।
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बताया जा रहा है कि कैथ के नामांकन में भाजपा की पार्षद फरमिला प्रस्तावक बनी हैं। उन्होंने भी भाजपा के आलाकमान के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। इस पूरे घटनाक्रम से एक बात तो तय हो गई है कि भाजपा के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी के अंदर गुटबाजी का कैंसर खत्म होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। पार्टी की किरकिरी पर प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि सभी पार्षद भाजपा परिवार के सदस्य हैं, जो रूठे हैं, उन्हें मना लिया जाएगा।
कैंथ क्यों बने बागी
मेयर उम्मीदवार के लिए पार्टी में चार नामों पर विचार चल रहा था। इसमें सतीश कैंथ का भी नाम शामिल था। वह साल 2015 में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए थे। कांग्रेस कार्यकाल में वे दो बार डिप्टी मेयर भी रहे थे। रविवार को हुई बैठक में जब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने सभी पार्षदों और संगठनों से अलग-अलग बातचीत की तो कैंथ को कुछ लोगों ने जानकारी दे दी कि ज्यादातर पार्षदों ने उनके ही नाम पर सहमति जताई है और कालिया का विरोध किया है।
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अगले दिन यानी सोमवार को मीडिया के एक वर्ग में खबर आई कि पार्षदों की राय में कालिया पिछड़ गए हैं, जबकि कालिया के नाम पर संजय गुट के 11 पार्षद और किरण गुट के छह पार्षदों ने सहमति जताई थी। इसके बाद कैंथ को भी लगा कि उनके पार्षद साथियों ने उन्हीं का नाम आगे बढ़ाया था। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि सोमवार को जब भाजपा प्रेस कांफ्रेंस में मेयर प्रत्याशी के नाम की घोषणा की करेगी तो उनका ही नाम होगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और वे बागी बन गए।
कैंथ को भाजपा के एक बड़े नेता की शह
भाजपा के संगठन से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि कैंथ को भाजपा के एक बड़े नेता की शह मिल रही है। वे लोग नहीं चाहते हैं कि पार्टी में सबकुछ ठीक रहे। पार्टी इस मुद्दे पर नजर रख रही है। पदाधिकारियों ने बताया कि पहले रूठे साथी को मनाया जाएगा। उसके बाद शह देने वाले लोगों के खिलाफ केंद्रीय संगठन को शिकायत दी जाएगी।
बीते साल भी हुई थी बगावत
गुटबाजी से भाजपा का पुराना नाता रहा है। बीते वर्ष जब मेयर देवेश मोदगिल ने नामांकन भरा था तो भाजपा की पूर्व मेयर आशा जसवाल ने भी परचा भर दिया था। हालांकि बाद में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद आशा ने अपना नाम वापस ले लिया था। उसके बाद टंडन और सांसद किरण खेर के बीच तल्खी बढ़ी, लेकिन मेयर प्रत्याशी घोषित होने से ठीक पहले दोनों ने खटास दूर की और मेयर प्रत्याशी पर एकजुट हुए।
क्या कहना है कि कैंथ का
सतीश कैंथ के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष और सांसद जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। संगठन मंत्री दिनेश कुमार से भी मुलाकात की थी। एक वर्ष से पार्टी को जो नुकसान पहुंचा रहे हैं, उन्हें मेयर पद दिया गया। 10 दिनों से चर्चा चल रही है कि वाल्मीकि समाज का वोट अधिक है। यदि वाल्मीकि समाज का अधिक वोट है तो लोकसभा चुनाव में भी टिकट इसी बिरादरी को देना चाहिए। मैं अपने स्टैंड पर कायम हूं। मैं किसी के दबाव में नहीं हूं।
कैंथ को इनका मिला समर्थन
भाजपा से बगावत करके सतीश कुमार कैंथ ने सबसे अंत में नामांकन किया। सतीश कैंथ को भाजपा पार्षद फरमिला और निर्दलीय दलीप शर्मा ने समर्थन किया है। फरमिला देवी कैंथ की प्रस्तावक बनी हैं।
आपस में मतभेद हो सकते हैं मनभेद नहीं। सभी पार्षद अपने हैं। कोई अगर रूठा है तो उसे मना लिया जाएगा। - संजय टंडन, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
कैंथ की बगावत से कालिया की राह हुई मुश्किल
पार्षद राजेश कालिया को मेयर उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने एक साथ कई निशाने साधने की कोशिश की है लेकिन सतीश कैंथ की बगावत भाजपा को मुश्किल में डाल सकती है। हालांकि भाजपा नेताओं को कहना है कि सतीश कैंथ समेत उन सभी पार्षदों को मना लिया जाएगा, जो रूठे हैं। उधर, कांग्रेस भी भाजपा की बगावत का फायदा उठा सकती है।
बता दें कि मेयर की लिए इस बार आरक्षित सीट होने के चलते भाजपा की ओर से राजेश कालिया, भरत कुमार, फरमीला और सतीश कैंथ मेयर प्रत्याशी की दौड़ में शामिल थे। सभी ने आलाकमान के समक्ष अपने-अपने दावे पेश किए थे। प्रत्याशियों की ओर से प्रबल दावेदारी होने के चलते पार्टी आलाकमान ने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभाग झा को पार्षदों की राय लेने के लिए बीते रविवार को यहां भेजा था।
प्रभात झा ने अलग-अलग पार्षदों की राय जानी। साथ ही संयुक्त बैठक भी की। इसके बाद वह दिल्ली चले गए और अपनी रिपोर्ट दी। सोमवार को आलाकमान के निर्देश पर राजेश कालिया को प्रत्याशी बना दिया गया लेकिन कालिया के नाम की घोषणा होते ही पार्टी में बगावत हो गई। सतीश कैंथ नामांकन कर दिया है। ऐसे में अब भाजपा को क्रॉस वोटिंग का डर सताने लगा है। कांग्रेस ने अगर इस बगावत का फायदा उठाकर खेल कर दिया तो पार्टी के लिए मेयर का सपना अधूरा रहा सकता है।
भाजपा पार्षद सतीश कुमार कैंथ के बगावती तेवर और नामांकन भरने के बाद कांग्रेस में खुशी की लहर है और भाजपा सकते में है। कांग्रेस के रणनीतिकारों की बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। सोमवार शाम को पूर्व केंद्रीय मंत्री ने प्रदेशाध्यक्ष के अलावा अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मंत्रणा की। भाजपा को पटकनी देने के लिए रणनीति बनाई गई। 26 पार्षदों वाली नगर निगम सदन की बैठक 18 जनवरी को है।
इसी दिन मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होना है। 26 में से 20 पार्षद भाजपा, चार कांग्रेस के, एक अकाली और एक निर्दलीय हैं। अब चार पार्षद वाली कांग्रेस ने तीनों पदों पर नामांकन भरा है। कांग्रेस को खुशी इस बात की है कि भाजपा में बगावत हो गई है। सतीश कैंथ ने कहा कि वे किसी भी हाल में चुनाव मैदान से नहीं हटेंगे।
यदि यही हाल रहा तो अंत समय में कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवारों को नामांकन वापस करने को कहेगी और कैंथ के समर्थन में अपने पार्षदों को मतदान करने के लिए कह सकती है। इसका कारण राजेश कालिया नहीं है और भाजपा में गुटबाजी से कांग्रेस खुशी में है। दूसरी ओर यदि भाजपा सतीश कैंथ को किसी तरह से मना ले और उन्हें नाम वापस करने को कहे तो फिर कांग्रेस पार्टी के मेयर उम्मीदवार शीला देवी का मत बढ़ सकता है। कैंथ के नामांकन करने के साथ ही पूरे शहर में यह चर्चा शुरू हो गई है।
ऊंट किस करवट बैठेगा, अभी कहा नहीं जा सकता। हमारी पार्टी राष्ट्रीय पार्टी है। अभी कई दिन हैं। पार्टी की बैठकें होंगी। उसमें तय होगा कि हमारी रणनीति क्या होगी।
- देवेंद्र सिंह बबला, पार्षद, कांग्रेस
हमने सोच समझकर फैसला लिया है। सतीश कैंथ का समर्थन किया है तो उसे जिताएंगे भी।
- दलीप शर्मा, निर्दलीय पार्षद