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दस प्वाइंट में समझें महम कांड: हरियाणा का वो उपचुनाव, जिसमें खेली गई थी खून की होली....ओपी चौटाला से है गहरा नाता

Fri, 27 May 2022 02:09 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा की महम जाट विधानसभा सीट जाट बहुल मानी जाती है। हरियाणा के गठन के बाद से ही इस सीट पर जाट समुदाय के ही विधायक बने हैं। देश के उपप्रधानमंत्री रह चुके चौधरी देवीलाल तीन बार यहां से विधायक बने थे।
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विस्तार
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रोहतक की विधानसभा सीट महम में 1990 में हुआ उपचुनाव देश का सबसे खूनी उपचुनाव माना जाता है। इस कांड के कारण महम चौबीसी पूरे देश में बदनाम हो गया था। हरियाणा की बड़ी घटनाओं में शामिल महम कांड में 10 लोग मारे गए थे। आय से अधिक संपत्ति मामले में सजा पाने वाले हरियाणा के पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला का इस कांड से बड़ा गहरा नाता है। 

ताऊ देवीलाल के उप प्रधानमंत्री बनने के बाद खाली हुई थी महम विधानसभा सीट

1989 में ताऊ देवीलाल देश के उप प्रधानमंत्री बन गए। उनकी जगह चौधरी ओमप्रकाश चौटाला प्रदेश के सीएम बने। उस समय चौटाला राज्य विधानसभा के सदस्य नहीं थे। नियमों के तहत मुख्यमंत्री बने रहने के लिए नियमानुसार छह माह के अंदर उनका विधानसभा का चुनाव जीतना अनिवार्य था। चौधरी देवीलाल ने सांसद बनने के बाद महम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में विधानसभा की महम सीट खाली थी। 

27 फरवरी 1990 को हुए थे उपचुनाव

  1. ताऊ देवीलाल के उपप्रधानमंत्री बनने के बाद सीएम बने थे ओमप्रकाश चौटाला  
  2. चुनाव लड़ने के लिए ओमप्रकाश चौटाला ने महम से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया 
  3. चुनाव आयोग ने महम विधानसभा का उपचुनाव कराने के लिए 27 फरवरी 1990 का दिन तय किया।
  4. ताऊ देवीलाल के करीबी व कांग्रेस के मौजूदा विधायक आनंद सिंह दांगी ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन पद से इस्तीफा देकर महम से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया।
  5. चुनाव आयोग ने धांधली की शिकायतों के मद्देनजर आठ मतदान केंद्रों (बूथों) बैंसी, चांदी, महम, भैणी महाराजपुर और खरैंटी में पुनर्मतदान कराने का फैसला किया। 
  6. 28 फरवरी को सुबह आठ बजे बैंसी के राजकीय कन्या हाईस्कूल में पुनर्मतदान के लिए वोटिंग शुरू हुई। 
  7.  शमशेर सिंह अहलावत, अभय सिंह चौटाला, भूपेंद्र सिंह उर्फ भूपी निवासी दरियापुर व अन्य लोग वाहनों में पहुंचे।
  8. मतदान केंद्र में जाने की बात पर उनका आनंद दांगी के भाई धर्मपाल दांगी के साथ झगड़ा हो गया
  9. फायरिंग हुई और धर्मपाल के साथ खड़ा दलबीर गिर गया। 
  10. इसके बाद आम लोगों पर फायरिंग हुई जिसमें करीब दस लोग मारे गए। 

वाहनों में सवार होकर आए लोगों ने की थी फायरिंग

भिवानी जिले के गांव खरक जाटान निवासी रामफल ने याचिका दायर कर बताया था वह 27 फरवरी 1990 को हुए मतदान के बाद शाम करीब छह बजे अपने परिवार के साथ घर में बैठे हुए थे। उसका बड़ा भाई हरी सिंह भी मौके पर मौजूद था। तभी वहां पंचायती उम्मीदवार आनंद सिंह दांगी पहुंचे और उन्होंने हरी सिंह से अगले दिन सुबह होने वाले पुनर्मतदान के लिए प्रचार में मदद करने की अपील की। हरी सिंह दांगी के साथ चल पड़े। 28 फरवरी को सुबह आठ बजे बैंसी के राजकीय कन्या हाईस्कूल के गेट पर पहुंचे, पुनर्मतदान के लिए वोटिंग शुरू हो चुकी थी। हरी सिंह स्कूल के गेट पर खड़ा था। अचानक तीन चार वाहन स्कूल के गेट पर पहुंचे।

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वाहनों में शमशेर सिंह अहलावत, अभय सिंह चौटाला, भूपेंद्र सिंह उर्फ भूपी निवासी दरियापुर व अन्य लोग सवार थे। वे मतदान केंद्र की ओर बढ़ने लगे तो आनंद सिंह दांगी के भाई धर्मपाल दांगी ने बूथ के अंदर प्रवेश न करने के लिए कहा। इस बात को लेकर झगड़ा हो गया। इस दौरान गोली लगने से धर्मपाल दांगी के साथ खड़े निंदाना निवासी दलबीर गिर पड़े। इसके बाद गेट के आसपास खड़ी पब्लिक को निशाना बना कर फायरिंग की गई। एक गोली याचिकाकर्ता के भाई हरी सिंह को लगी। हरी सिंह सड़क पर गिर पड़ा। उसे पीजीआई ले जाने लगे, लेकिन लाखनमाजरा के पास उसके भाई ने दम तोड़ दिया। पुनर्मतदान के दिन हिंसा में 10 लोग मारे गए थे।  

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