पंजाब के तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय के फर्जी हस्ताक्षर कर 11 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति मामले में एक और खुलासा हुआ है। आरोपियों ने डीजीपी के फर्जी हस्ताक्षर कर दो सिपाहियों को भी भर्ती करवाया है। इस मामले में एसआईटी ने मोहाली साइबर सेल में तैनात निरीक्षक सतवंत सिंह और बर्खास्त चल रहे उपनिरीक्षक सरबजीत को गिरफ्तार कर लिया है। पूरे मामले का मास्टरमाइंड उपनिरीक्षक हरविंदर सिंह अभी फरार चल रहा है। पुलिस दोनों आरोपियों को गुरुवार को जिला अदालत में पेश करेगी। फर्जी हस्ताक्षर मामले में मोहाली फेज-6 निवासी संदीप कुमार (55), मनी कटोच (33), चंडीगढ़ सेक्टर-39 निवासी बहादुर सिंह (52), मोहाली के थ्रीबीटू निवासी सरबजीत सिंह (47) और फाजिल्का निवासी सतवंत सिंह (48) को एसआईटी गिरफ्तार कर चुकी है।
एसआईटी को आरोपी संदीप कुमार से लैपटॉप और आरोपियों के मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं। इसके अलावा टीम ने सीपीयू, जाली ऑर्डर की कॉपी और डिस्पैच रजिस्टर भी कब्जे में लिया है। पुलिस ने आरोपी मनी कटोच के कब्जे से कार बरामद की है। संदीप कुमार के खिलाफ मोहाली फेस-8 में पीसी एक्ट के तहत केस दर्ज है। जबकि, सरबजीत सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट का केस दर्ज है।
आरोपी हरविंदर सिंह खुद को डीजीपी के फर्जी हस्ताक्षर कर कई बार पदोन्नति ले चुका है। चार महीने में वह सिपाही से उपनिरीक्षक बन गया था। उसने खुद के बेटे को भी डीजीपी के फर्जी हस्ताक्षर कर पंजाब पुलिस में सिपाही के रैंक पर भर्ती करवा दिया था। इसके अलाव एक और सिपाही को भी इसी तरह भर्ती करवाया था। इस मामले की जांच आरोपी की गिरफ्तारी के बाद होगी।
एसआईटी ने बुधवार को पंजाब पुलिस मुख्यालय में जीबी ब्रांच के सुपरिंटेंडेंट संदीप कुमार, ई-1 ब्रांच में तैनात बहादुर सिंह और हाल ही में अमृतसर से 13 बटालियन सेक्टर-1 चंडीगढ़ ट्रांसफर हुए हवलदार मनी कटोच को जिला अदालत में पेश किया। जहां से आरोपियों को चार दिन के रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस चारों से पूछताछ कर रही है।