शुद्ध देसी घी में प्राकृतिक रूप से बीआर का लेवल 30 होना चाहिए। इस लेवल को बरकरार रखने के लिए फैक्ट्री संचालक बाजार में बिकने वाले हानिकारक बीआर का प्रयोग पॉम ऑयल में कर रहे थे। देखने और खाने में यह घी शुद्ध ही लगता था, पर इसके लगातार सेवन से इंसान की जान तक जा सकती है। 50 रुपये किलो पॉम ऑयल से बनता था 450 किलो का देसी घी महज पचास रुपये किलो मिलने वाले पॉम ऑयल में तरह—तरह के केमिकल्स मिलाकर 450 रुपये किलो देसी घी के रूप में बेचा जा रहा था।
फैक्ट्री में पॉम ऑयल व बीआर को गर्म करके इसमें तरह-तरह के केमिकल्स डालकर देसी घी व मक्खन तैयार किया जाता था। देसी घी को बड़े—बड़े पीपों में पैक किया जाता, जबकि मक्खन को गत्ते के डिब्बों में डालकर बाजार में भेजा जा रहा था। पॉम ऑयल ठीक उसी तरह जमी हुई अवस्था में होता है जैसे डालडा घी। इससे तैयार होने वाले घी व मक्खन के सेवन से किडनी, गुर्दे, दिल की बीमारियों के साथ-साथ इंसान की याददाश्त भी कमजोर हो सकती है।
इस फैक्ट्री में तैयार होने वाला सामान पंजाब भर में सप्लाई होता था। विभाग ने फैक्ट्री को सील कर दिया है। साथ ही देसी घी, मक्खन व पॉम ऑयल के सैंपल भरकर जांच के लिए लेबोरेट्री में भेजे हैं।