क्रिकेट विश्व कप का खुमार सभी के सिर चढ़कर बोल रहा है। विश्व कप में अफगानिस्तान की यंगिस्तान टीम का विपक्षी टीमों पर भारी पड़ना सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है। वहीं, पूर्व विश्व विजेताओं का निराशाजनक प्रदर्शन भी कई सवाल खड़े कर रहा है।
विशेषज्ञों ने अफगानिस्तान की जीत और वेस्टइंडीज टीम के पतन के कारणों पर खुलकर विचार रखे। अफगानिस्तान के विशेषज्ञ ने जीत के लिए युवा टीम की एकाग्रता और देशभक्ति के भाव को कारण बताया। वहीं, वर्ल्ड कप में क्वालीफाई न कर सकी वेस्टइंडीज टीम के बारे में इंडीज के विशेषज्ञ ने विज्ञान और तकनीकी से दूरी इसका खामियाजा बताया। वे पिछले दिनों शहर में आयोजित वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ साइंस एंड मेडिसिन में आए थे। दोनों देशों के क्रिकेट विशेषज्ञों ने इन टीमों के बारे में विस्तार से बताया।
अफगानी खिलाड़ियों को मिल रहा सहयोग, तनाव मुक्त होकर दिखा रहे खेल
अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के परामर्शदाता हड्डी रोग विशेषज्ञ व पीजीआई के पूर्व छात्र डॉ. इमाल वरदक का कहना है कि उनकी टीम के खिलाड़ी चमक रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके खिलाड़ियों को अनुभव के साथ ही विस्तार भी मिल रहा है। उनके युवा मांसपेशियों के साथ अपने दिमाग का पूरा उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें सरकार सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और मानसिक सहयोग दे रही है जिससे वे तनाव मुक्त होकर खेल रहे हैं। वहीं, देशभक्ति की भावना भी उन्हें जीत के लिए उत्साहित कर रही है। वे क्रिकेट के बल पर अपने देश को विश्वपटल पर स्थापित करने के प्रयास में जुटे हैं। वहीं, आधुनिक तकनीक का उपयोग कर चोट की घटनाओं में लगभग 40 प्रतिशत की कमी लाई गई है। टीम के बीच एकता है। इसलिए हमें जीत लक की नहीं मेहनत की बदौलत मिल रही है।
वेस्टइंडीज की टीम को लक्ष्य से भटकाव और पिछड़ापन ने गर्त में धकेला
विश्व विजेता वेस्टइंडीज का तमगा अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। अब हमारी टीम हमें निराश कर रही है। इसमें हमारे खिलाड़ियों का कोई दोष नहीं है। तकनीकी और विज्ञान को नकारना हमारी हार का सबसे बड़ा कारण हैं। यह कहना है वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के बोर्ड सदस्य अक्षयमान सिंह का। उनका कहना है कि जब हम टॉप पर थे तब देश में क्रिकेट का क्रेज हावी था। अब तो खिलाड़ी मैच खेलने के लिए लंबा इंतजार करते रहते हैं। उनके पास अवसर ही नहीं है खुद को साबित करने का।
जब हम जीत रहे थे तब पूरी दुनिया ने विज्ञान और तकनीक को हमें हराने के लिए उपयोग किया। लेकिन हमने ऐसा करना ठीक नहीं समझा। अब हर उम्र के क्रिकेट में हम पीछे जा रहे हैं। अब सुधार के लिए तैयार हैं तो हमारे पास पैसे नहीं हैं। इतना ही नहीं जब हम क्रिकेट में हारने लगे तो हमारा पूरा ध्यान फुटबॉल में चला गया। फिर महिला खिलाड़ियों पर केंद्रित हो गए। उसके बाद ओलंपिक पर ध्यान लग गया। ऐसे में क्रिकेट लंबे समय से नजरअंदाज हो रहा है। जिसका खामियाजा हार के रूप में चुकाना पड़ रहा है।