Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
चंडीगढ़ में सीमित संख्या में पेट्रोल वाहनों का पंजीकरण करने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि आज का कचरा तो संभाला नहीं जा रहा, इन वाहनों की मियाद पूरी होने के बाद ई-वाहनों से निकलने वाले कचरे का कैसे निपटारा होगा। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए संजय कुमार व अन्य ने बताया था कि उन्होंने गैर ईवी वाहन खरीदने के लिए बुकिंग करवाई थी लेकिन प्रशासन ने इसके पंजीकरण की मंजूरी ही नहीं दी। इसके जवाब में प्रशासन ने बताया था कि उन्होंने गैर इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण की सीमा तय की है और उसी के अनुसार पंजीकरण किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने इस पर प्रशासन से पूछा कि इस नीति को लागू करने के पीछे प्रशासन की योजना क्या है।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि प्रदूषण कम करना उनकी नीति का सबसे बड़ा उद्देश्य है। हाईकोर्ट ने इस पर प्रशासन को सवालों के घेरे खड़ा करते हुए कहा कि आज का कचरा आपसे संभाला नहीं जा रहा है तो कल का हाल क्या ही होगा। मियाद पूरी होने के बाद इन ई-वाहनों का जो कचरा होगा, उसका प्रशासन क्या करेगा। हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि पंजीकरण की सीमा तय करने के लिए प्रशासन ने क्या आधार बनाया है। इस पर सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अनिल मेहता ने जवाब के लिए कुछ मोहलत मांगी। इस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई को कुछ देर के लिए टाल दिया।
दोबारा सुनवाई शुरू होने पर मेहता ने हाईकोर्ट को बताया कि बीते वर्षों की बिक्री को आधार बनाते हुए गैर ईवी वाहनों की बिक्री का 35 प्रतिशत पंजीकरण करने का निर्णय लिया गया है। हाईकोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी देश या राज्य ने इस प्रकार का निर्णय नहीं लिया तो आप किस आधार पर ऐसा कर रहे हैं। प्रशासन के वकील ने कहा कि चंडीगढ़ पहला ऐसा राज्य बनकर मिसाल कायम करेगा। हाईकोर्ट ने फिलहाल प्रशासन की दलीलों पर असंतुष्टी जताते हुए अब विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।