हजारों मरीजों का उदाहरण बन रहा सहायक
डाटा बैंक डिसीजन के फार्मूले पर तैयार किए गए इस योजना में पीजीआई के लगभग सभी विभागों के 6000 मरीजों का आंकड़ा पूरी डिटेल के साथ एकत्रित किया जा चुका है। ऐसे में इसकी मदद से अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञ गंभीर मरीजों के इलाज में मदद ले रहे हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के पीजीआई के सीनियर रिसर्च फेलो व इस योजना पर प्रो पुरी के निर्देश पर काम कर रहे सुशांत कुमार ने बताया कि डाटा में फीड हजारों तरह के गंभीर मरीजों का उदाहरण देखकर के डॉक्टर अपने मरीजों की मौजूदा स्थिति का आकलन करते हैं। इस तकनीक में अलग-अलग मरीजों की उम्र, हाइट, वजन व शारीरिक संरचना के आधार पर जानकारी फीड की गई है जिससे आने वाले समय में मरीज के इलाज में प्रयोग किए जाने वाले चिकित्सा तकनीक व दवाओं के डोज का उचित मूल्यांकन करने में ज्यादा परेशानी ना हो।
ऑपरेशन थियेटर में लगा सिस्टम
सुशांत कुमार ने बताया कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत पीजीआई की ओटी में कंप्यूटर सभी एनेस्थीसिया मशीन से कनेक्ट कर दी गई है जिससे सर्जरी के दौरान की जाने वाली सभी प्रक्रिया, यहां तक कि मरीज को दी जाने वाली दवा तक की डिटेल कंप्यूटर में फीड होती जाती है। उस कंप्यूटर को सर्वर से जोड़ा गया है। वहीं इस सारी डिटेल को ऑटोमेटिक और मैनुअल तरीके से कंप्यूटर में फीड किया जाता है। जिससे अब तक 6000 मरीजों का अलग-अलग डाटा रिस्टोर हो चुका है। जिसमें पीजीआई के अलग-अलग विभागों से जुड़े मरीज शामिल हैं।
सुपर कम्प्यूटर के साथ मिलकर हो रहा काम
इस योजना को आगे और सफल बनाने के लिए मौजूदा समय में पीजीआई सुपर कंप्यूटर के साथ मिलकर परम युक्ति पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि पीजीआई ने चार साल पहले इंफोसिस के साथ मिलकर यह काम शुरू किया था। इसके लिए नेशनल सुपर कंप्यूटर मिशन के तहत फंडिंग की जा रही है।
पीजीआई में एनेस्थीसिया इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम को लेकर चार साल पहले जो परिकल्पना की गई थी वह धीरे धीरे साकार होने लगा है। इस तकनीक की मदद से गंभीर मरीजों के इलाज में काफी मदद मिलने लगी है। इससे इलाज की राह और आसान होगी। -प्रो. जीडी पुरी, पीजीआई के पूर्व डीन एकेडमिक व एनेस्थीसिया विभाग के पूर्व प्रमुख।