दिव्य जागृति ज्योति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज की दिल की धड़कन वापस लाने के लिए डाक्टर दो घंटे जुटे रहे थे। डेरे के प्रवक्ता आठ दिन से दावा कर रहे हैं कि महाराज गहन समाधि में है लेकिन हकीकत है कि डेरे में जिस दिन महाराज की क्लीनिकली डेथ हुई, उसके दो घंटे बाद तक चिकित्सकों ने उनके दिल की धड़कन वापस लाने की पूरी कोशिश की।
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तत्काल अपोलो अस्पताल से एंबुलेंस भी मंगवा ली गई थी लेकिन अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों ने जब उनकी नब्ज व दिल का धड़कन सुनी तो वह शून्य थी। डॉक्टरों ने उन्हें क्लीनिकल डेड करार दे दिया गया।
सवाल है कि अगर महाराज गहन समाधि में गए थे तो उनके शरीर के साथ दो घंटे तक चिकित्सकों ने माथापच्ची क्यों की? जानकारी के मुताबिक जिस दिन महाराज आशुतोष की गहन समाधि में गए, उससे कुछ समय पहले वे एक टीवी चैनल पर संस्थान की एक प्रवक्ता की बहस सुन रहे थे।
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उसके बाद उन्होंने अचानक सेवादारों से कहा कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है। इसके बाद डेरे के चिकित्सकों को बुलाया गया, जिन्होंने नब्ज देखी और ईसीजी की तो वह शून्य थी।
तत्काल अपोलो अस्पताल को सूचना भेजी गई और टीम को एंबुलेंस समेत बुलाया गया। चिकित्सकों ने महाराज की दिल की धड़कन वापस लाने के लिए हार्ट को पंप किया। वे दो घंटे तक प्रयास करते रहे। बाद में अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने भी उन्हें क्लीनिकली डेड करार दे दिया।
दूसरा खुलासा: रात को ही दे दी गई पुलिस को सूचना
28 जनवरी की रात को ही डेरा प्रबंधकों व पहली कतार के सेवादारों ने तो पहले महाराज को ब्रह्मलीन बताकर पुलिस अधिकारियों को रात को सूचना दे दी थी ताकि सारे बंदोबस्त पूरे हो सकें।
प्रशासन की तरफ से भी पूरी तैयारी हो गई थी लेकिन बाद में डेरे के कई सेवादारों ने कहना शुरू कर दिया कि महाराज से साधना के दौरान उनका संपर्क हुआ है। उन्होंने वापस आने की बात और देह संभालने की बात कही है। डेरे के प्रबंधकों व प्रवक्ता इसे मेडिकल साइंस से ऊपर की बात कहने लगे और देह को फ्रीजर में रख दिया गया।
अब हाईकोर्ट में जवाब देने के लिए स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने सरकारी चिकित्सक से महाराज का चेकअप नहीं करवाया। पहले ही दिन चेक करने वाले चिकित्सकों की लिखित रिपोर्ट को आधार बनाकर शपथ पत्र हाईकोर्ट में फाइल कर दिया।
एसएसपी जसप्रीत सिंह का कहना है कि डेरे के चिकित्सकों ने ही लिखित रिपोर्ट में क्लीनिकल डेथ कह दिया था। इसी को आधार बनाया गया है।
तीसरा खुलासा: सरकार ने भी माना, क्लीनिकली डेड
पंजाब सरकार ने दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड करार दिया है। पंजाब सरकार की ओर से नकोदर के डीएसपी एचपीएस परमार ने बुधवार को हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय मजिस्ट्रेट और नकोदर थाने के एसएचओ के साथ मेडिकल टीम आश्रम में गई थी। टीम ने स्पष्ट किया है कि महाराज क्लीनिकली डेड हैं। हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सरकार से इस बारे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी।
उधर, संस्थान की तरफ से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि आशुतोष महाराज लंबी समाधि की अवस्था में है। संस्थान के मुताबिक आशुतोष महाराज को बंधक बनाकर नहीं रखा गया है, न ही कोई प्रॉपर्टी विवाद चल रहा है। संस्थान ने याची की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कानूनी रूप से याचिका सही नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत संस्थान के पास स्वतंत्रता का का अधिकार है। इस पर याची के वकील कोई संतोषजनक जवाब हाईकोर्ट में नहीं दे पाए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि वे 11 फरवरी को इस पर अपना जवाब दाखिल करें, ताकि याचिका का निपटारा किया जा सके।
पंजाब सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में आशुतोष महाराज के मेडिकल सर्टिफिकेट भी संलग्न किए गए हैं।
चौथा खुलासा: एक ईंट के मालिक भी नहीं आशुतोष जी
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज की संपत्ति को लेकर चल रही विवाद की चर्चा को डेरा प्रबंधकों व प्रवक्ता ने खारिज कर दिया है। उनका मानना है कि इस तरह की चर्चा पूरी तरह से बेबुनियाद है।
डेरे के बारे में लगातार यह बात उठ रही थी कि हजार करोड़ की संपत्ति को लेकर घमासान चल रहा है, लेकिन डेरे के प्रवक्ता स्वामी विशालानंद का कहना है कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान एक पंजीकृत संस्था है।
डेरे की गवर्निंग बॉडी व सदस्यों में कोई फर्क नहीं है और न ही जनरल बॉडी के किसी सदस्य में ऐसी कोई बात है। उनका कहना है कि डेरे में गद्दी के लिए कोई प्रथा या वसीयत नहीं है। इसलिए गद्दी को लेकर विवाद की बात झूठी है।
डेरे की सारी संपत्ति चाहे जमीन हो या रकम, वह सोसाइटी की है। कोई एक इसमें एक पैसे का मालिक नहीं है। डेरे की गवर्निंग बॉडी व सदस्यों में कोई मनमुटाव नहीं है। सोसाइटी बकायदा सारे खातों व आयकर रिटर्न चुकता करती रही है।
स्वामी विशालानंद ने यह भी साफ किया है कि आशुतोष महाराज का कोई भी खाता किसी बैंक में नहीं है। यहां तक कि एक ईंट भी उनके नाम पर नहीं है।
पांचवां खुलासा: एसएसपी बोले-नहीं रहे आशुतोष जी
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख महाराज आशुतोष अब भी गहन समाधि में हैं। उनके अनुयायिओं व सेवादारों को अब भी विश्वास है कि वे समाधि से जरूर वापस लौटेंगे।
सेवादारों का कहना है कि महाराज आशुतोष की समाधि विज्ञान से ऊपर की बातें हैं। महाराज आशुतोष के लिए अब भी जेड सिक्योरिटी लगाई गई है। हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में यह लिखित तौर पर कहा जा चुका है कि महाराज आशुतोष क्लीनिकल डेड हैं।
उधर, एसएसपी जालंधर जसप्रीत सिंह सिद्धू का कहना है कि आठ दिन पहले ही महाराज आशुतोष की डेथ हो चुकी है। फिर उन्हें अवैध रूप से भला कैसे बंधक बनाया जा सकता? ऐसे में वह जेड सुरक्षा क्लीनिकल डेथ संत को कैसे मुहैया करवा सकते हैं?
उन्होंने कहा कि जल्द ही यह सिक्योरिटी हटवा ली जाएगी। दूसरी ओर सवाल अभी भी जारी है कि आखिरकार आठ दिनों तक सरकार ने कैसे आंखे मूंदे रखी?
छठा खुलासा: पहले झूठी निकली हैं पूर्ण सिंह की शिकायतें
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक महाराज आशुतोष के गहन समाधि में जाने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले पूर्ण सिंह का डेरे के साथ लंबे समय से विवाद रहा है। हालांकि पूर्ण सिंह बकायदा शपथ पत्र देकर डेरे से अपनी गलती मान चुका है। माना जा रहा है कि उसके द्वारा की गईं अब तक की चार शिकायतों को झूठा करार दिया जा चुका है।
पूर्ण सिंह खुद को आशुतोष महाराज का पूर्व ड्राइवर होने का दावा करता रहा है। वहीं डेरे की तरफ से बुधवार को जो दस्तावेज जारी किए गए, उसके मुताबिक पूर्ण सिंह ने नौ मई 2005 को बकायदा शपथ पत्र देकर माफी मांगी और कहा कि वह जो बयानबाजी कर रहा है, वह चंद लोगों के भड़काने पर की गई है। अब उसे अपने किए पर पछतावा हो रहा है।
मामले में नूरमहल पुलिस की ओर से एक पत्र की कॉपी जारी की गई, जिसे स्वामी विश्वदेवानंद ने जारी की है। उन्होंने कहा है कि पूर्ण सिंह ने साल 2007 में डेरे के खिलाफ चार बार शिकायतें की थी, जिनकी जांच में शिकायतें झूठी पाई गईं।