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क्या सच में आशुतोष महाराज समाधि में हैं?

Wed, 05 Feb 2014 07:59 PM IST
डिजिटल टीम/अमर उजाला, चंडीगढ़
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज की गहन समाधि को लेकर संस्पेंस बरकरार है। आखिर इस समाधि का सच क्या है? चिकित्सकों ने उन्हें क्लीनिकल डेड बताया है, वहीं प्रबंधकों व सेवादारों का कहना है कि वे गहन समाधि में हैं। शरीर का रंग बदलने के कारण अब महाराज का शरीर समाधि अवस्था में ही फ्रीजर में रख दिया गया है। उनके शरीर को शून्य डिग्री तापमान मुहैया करवाया गया है।
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उधर, आशुतोष महाराज का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भी पहुंच गया है। नूर महल निवासी पूर्ण सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने आशुतोष महाराज को गैर कानूनी रूप से बंधक बनाकर रखा है। याचिका में उनको रिहा करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है।

बीते सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएमएस बेदी पर आधारित सिंगल बेंच ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह बुधवार तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। मामले की आगामी सुनवाई 11 फरवरी को निर्धारित की गई है।
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अमर उजाला ने पहले उठाया मामला

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज मंगलवार 28 जनवरी की रात करीब साढ़े बारह बजे समाधि में गए थे। आशुतोष महाराज के समाधि में जाने की खबर फैलते ही 29 जनवरी से हजारों अनुयायी आश्रम में जमा होने लगे थे।

उसी दौरान महाराज आशुतोष की जांच करने के बाद अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों ने ये कहकर सनसनी मचा दी थी कि आशुतोष महाराज की नब्ज, दिल की धड़कन, ईसीजी सब शून्य थी। ऐसी अवस्था क्लीनिकल डेथ की होती है। मामला बढ़ते देख डेरा प्रबंधन भी हरकत में आ गया।

डेरे की तरफ से स्वामी विशालानंद व स्वामी विश्वानंद ने कहा है कि महाराज आशुतोष जी गहन साधना में है और अगले 72 घंटे तक वह साधना में रह सकते हैं। उन्होंने अपने शिष्यों व अनुयायियों को अधिक से अधिक ध्यान व साधना शिविरों का आयोजन करने की अपील की थी।
ये मामला सबसे पहले 29 जनवरी को अमर उजाला ने ही उठाया था। अब धीरे-धीरे सारे मीडिया में ये मामला प्रमुखता से छाया है।

क्या कहना है डेरा प्रबंधन का?

स्वामी विशालानंद व साध्वी जया भारती ने कहा कि जब संत लोग समाधि में चले जाते हैं तो हमारा फर्ज बनता है कि उनके शरीर की देखभाल करें। संत लोग हिमालय में इसलिए ही समाधि के लिए जाते थे क्योंकि वहां पर तापमान शून्य से कम होता था। वहां पर संत सालों समाधि लगाकर बैठते हैं, लेकिन महाराज आशुतोष कितने दिन फ्रीजर में रहेंगे, इस पर किसी का कोई उत्तर नहीं था।

स्वामी विश्वानंद ने कहा कि महाराज उच्च समाधि में हैं। वे अकसर कई दिनों के लिए अपना शरीर त्यागकर चले जाते हैं और वापस आ जाते हैं। समाधि की उच्चावस्था में चेतना अनंत में विस्तार प्राप्त करती है।

यह चेतना का स्थूल से सूक्ष्म जगत में प्रसार है। इसे आत्मा का परम तत्व में लीन होना भी कहा जा सकता है, जिसके तहत शरीर की क्रियाओं के रुकने से जो लक्षण उभरते हैं, उन्हें आधुनिक चिकित्सा विज्ञान डेथ सिम्पटम करार देता है।

स्वामी आदित्यानंद ने कहा कि ऐसी तमाम खबरें गलत हैं कि डेरे की संपत्ति का विवाद है। डेरे की गवर्निग बॉडी है जो पूरा संचालन कर रही है।

क्या कहते हैं चिकित्सक?

बीते सोमवार को दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल में हुई प्रेस वार्ता में साध्वी जया भारती, साध्वी पतेश्वरी भारती, स्वामी विशालानंद, स्वामी अरविंदानंद, स्वामी आदित्यानंद, स्वामी नरिंदरानंद के अलावा चंडीगढ़ से आए डॉक्टर हरपाल मौजूद थे।

चिकित्सक हरपाल ने बताया कि जिस दिन महाराज आशुतोष समाधि में गए, उस दिन उनको बुलाया गया था। वे डेरे पहुंचे तो पाया कि महाराज आशुतोष लेटे हुए थे और अपोलो अस्पताल के चिकित्सक उनकी जांच कर रहे थे। उनकी नब्ज, दिल की धड़कन, ईसीजी सब शून्य थी। ऐसी अवस्था क्लीनिकल डेथ की होती है।

इसके बाद उनको बताया गया कि महाराज आशुतोष गहन समाधि में हैं तो वे वापस चले गए थे। रविवार को वे वापस डेरे में पहुंचे तो दोबारा चेकअप किया। पाया कि सब कुछ पुराने जैसा ही है। उनकी त्वचा का रंग बदलता जा रहा है। ऐसे में शरीर को शून्य डिग्री में रखना जरूरी हो गया था। महाराज आशुतोष कितने दिन फ्रीजर में ही रहेंगे, यह बताने में वे असमर्थ दिखे।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला, पंजाब को नोटिस

पिछले कुछ दिनों से समाधि में गए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। नूर महल निवासी पूर्ण सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने आशुतोष महाराज को गैर कानूनी रूप से बंधक बनाकर रखा है। याचिका में उनको रिहा करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएमएस बेदी पर आधारित सिंगल बेंच ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह बुधवार तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। मामले की आगामी सुनवाई 11 फरवरी को निर्धारित की गई है।

हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में पंजाब सरकार के अलावा कुछ निजी लोगों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। इनमें दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के अरविंदानंद, मोहन पुरी, सर्वानंद, विशालानंद, नरेंदानंद शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि कुछ लोग गैर कानूनी तरीके से प्रॉपर्टी ट्रांसफर करवाने के बाद आशुतोष महाराज की हत्या कर देंगे। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर दिया।

प्रशासन भी हरकत में, डीआईजी, एसएसपी पहुंचे नूरमहल

मामला हाईकोर्ट में जाने के कारण अब प्रशासन भी हरकत में आ गया है। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल में मंगलवार को डीआईजी गुरिंदर ढिल्लों और जालंधर देहात के एसएसपी जसप्रीत सिंह सिद्धू पहुंचे। उन्होंने चार घंटे से अधिक समय डेरे के भीतर बने कार्यालय में बिताया। इस दौरान उन्होंने डेरा प्रबंधकों से लंबी बातचीत की। चार घंटे से अधिक समय बिताने के बाद दोनों वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बाहर निकले और जालंधर की तरफ निकल आए।

माना जा रहा है कि उनका दौरा हाईकोर्ट में दायर याचिका को लेकर था लेकिन डीआईजी और एसएसपी ने साफ इंकार किया कि उनका हाईकोर्ट के मामले में कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि वे उस केस में कोई पार्टी नहीं हैं।

डीआईजी ढिल्लों ने कहा कि उनके दौरे का मकसद सिर्फ सिक्योरिटी जांचना था। डेरे में पुलिस अधिकारी कोई दखलंदाजी नहीं करेंगे। अगर हाईकोर्ट में कोई मामला है तो वे उसमें कोई पार्टी नहीं हैं, इसलिए कुछ कह नहीं सकते।

वहीं, डेरे के स्वामी विशालानंद के मुताबिक आशुतोष महाराज अब भी गहन समाधि में हैं। उनके समाधि में रहने का इंतजार सारी उम्र किया जाएगा। संत तो समाधि में कई-कई साल रहते हैं। डेरे में आशुतोष महाराज के गहन समाधि के दर्शन भी संगतों को नहीं करवाए जा रहे हैं, जिसको लेकर काफी संशय बना है।

1983 में हुआ दिव्य जाग्रति संस्थान का उदय

जालंधर से महज 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा सा कस्बा नूरमहल विश्व के मानचित्र पर चमक रहा है, यह चमक यहां पर बने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की बदौलत है, जिसने अपना संदेश इस छोटे से कसबे से शुरू कर दुनिया के 15 मजबूत देशों में फैला दिया। अमेरिका हो या इंग्लैंड, हर स्थान पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान कार्य कर रहा है।

महाराज आशुतोष जी पंजाब की धरती पर उस समय आए थे, जब यहां पर आतंकवाद का काला दौर था। सन 1983 में उन्होंने प्रेम का संदेश लेकर नूरमहल के मोहल्ला छीबियां में छोटा सा मकान किराए पर लिया और लोगों को प्रेम व शांति का उपदेश देना शुरू कर दिया।

इसी छोटे से घर में सतसंग शुरू किया और अमन व शांति का संदेश देते हुए महाराज आशुतोष ने इसका प्रसार करना शुरू कर दिया।

आतंकियों के निशाने पर रहे आशुतोष महाराज

एक समय पंजाब में ऐसा आया कि दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान व सिख समुदाय के बीच जबरदस्त तनाव हो गया। सिख संगठनों ने इस डेरे का विरोध करना शुरू कर दिया। तभी से इस डेरे की सुरक्षा लगा दी गई।

उस समय पंजाब में आतंकवाद का काला दौर खत्म हो चुका था लेकिन विदेशों में बैठे आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, खालिस्तान कमांडो फोर्स आशुतोष महाराज पर हमले की योजना बनाने लगे ताकि पंजाब में हालात खराब किए जा सके।

कई बार पाकिस्तान से आया असहला व आरडीएक्स बरामद भी किया गया, जिसका उपयोग नूरमहल के डेरा संचालक आशुतोष महाराज की हत्या के लिए किया जाना था। आईबी व काउंटर इंटेलिजेंस की टीमों ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की सुरक्षा बंदोबस्त पुख्ता करने के आदेश जारी किए और साथ ही महाराज आशुतोष की सुरक्षा मजबूत कर दी गई।

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7 राज्यों के 112 शहरों में केंद्र

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने देश में 17 राज्यों के 112 शहरों में अपने केंद्र स्थापित किए। इसके साथ ही यूके, अमेरिका, कनाडा, थाईलैंड, नेपाल, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, दुबई में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के केंद्र स्थापित कर लोगों को अमन शांति व ध्यान शिविर लगाने शुरू किए।

महाराज आशुतोष का मिशन था कि समाज में महिला व पुरूषों की संख्या में संतुलन हो और इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को जागृत करने का भी प्रयास किया, जो काफी सफल रहा।

15-16 जनवरी को श्री फोर्ट ओडिटोरियम में केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय व उत्थान विभाग द्वारा कार्यक्रम में करवाया गया, जिसमें दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की आंखों की रोशनी से वंचित टीम ने नेशनल म्यूजिक व डांस कंप्टीशन में पहला स्थान हासिल किया।
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