हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के पूर्व सैनिक भी अब किसानों के साथ उनके आंदोलन का मोर्चा संभालेंगे। दोनों सूबों के कई पूर्व सैनिकों के संगठनों ने किसान आंदोलन को खुला समर्थन दे दिया है। हरियाणा से पूर्व सैनिकों का जत्था 17 दिसंबर को किसानों को समर्थन देने के लिए दिल्ली कूच करेगा। इन संगठनों ने किसानों को हरसंभव मदद का आश्वासन देते हुए सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द आंदोलन को खत्म करवाया जाए।
हरियाणा, पंजाब समेत अन्य राज्यों के किसान 21 दिनों से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर डटे हुए हैं। ये किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की जिद पर अड़े हैं। आंदोलनरत इन किसानों की संख्या बॉर्डर पर बढ़ रही है। गैर किसान संगठन भी इस आंदोलन में बढ़चढ़कर किसानों का साथ दे रहे हैं। हरियाणा की कई खापें भी किसानों को अपना खुला समर्थन दे रही हैं। जबकि राजनीतिक दल भी किसानों के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। इसी कड़ी में हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के पूर्व सैनिकों के संगठनों ने भी किसानों का साथ देने का एलान किया है। पूर्व सैनिक संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन अब ज्यादा लंबा नहीं खिंचना चाहिए, सरकार को इसे सकारात्मक रवैये के साथ खत्म करवाना चाहिए। इससे आमजन को भी अब खासी परेशानियां हो रही है।
किसानों को खुला समर्थन देने के लिए पूर्व सैनिकों का जत्था छह से अधिक वाहनों के साथ दिल्ली के लिए कूच करेगा। वहां किसानों के साथ धरने पर बैठा जाएगा और उनका हौसला बढ़ाया जाएगा। किसान देश का अन्नदाता है। मगर विडंबना है कि आज वे सड़कों पर अपने हकों के लिए बैठा है। सरकार किसानों की बात को समझे कि आखिरकार क्यों वे नए कृषि कानूनों को लेकर आशंकित है। सरकार जल्द इस आंदोलन को खत्म करवाए। - अतर सिंह मुल्तानी, प्रधान, पूर्व सैनिक वेलफेयर कमेटी।
हठधर्मिता छोड़े सरकार, आंदोलन का हल निकाले
सरकार इस मसले पर अब हठधर्मिता छोड़ दे। सरकार को देखना चाहिए कि आखिरकार कृषि कानूनों पर किन मुद्दों को लेकर गतिरोध बना हुआ है। किसान आखिरकार इन बिलों से इतना डरा हुआ क्यों हैं। कृषि प्रधान इस देश में अन्नदाता के साथ बिल्कुल ज्यादती नहीं होनी चाहिए। किसानों के दिलोदिमाग में जो भी शंका है, उसे सौहार्दपूर्ण माहौल में दूर करना चाहिए और किसानों की मांग को पूरा करना चाहिए।
- खुशबीर सिंह दत्त, महासचिव, पूर्व सैनिक वेलफेयर कमेटी।
कृषि कानून किसानों के हित में होने चाहिए
हमारे संगठन का पूरा समर्थन किसानों के साथ है। यदि किसान इन कानूनों को लेकर इतना डरा हुआ है तो सरकार को या तो इन कानूनों को वापस लेना चाहिए या फिर किसानों के मुताबिक उसमें संशोधन करना चाहिए। सरकार जो भी कृषि कानून तैयार करे, वो पूरी तरह किसानों के हित में होना चाहिए। आंदोलन का माहौल असमाजिक तत्व न बिगाड़ सकें, इसके लिए सरकार और किसानों को सतर्क रहना होगा।
- राकेश शर्मा, अध्यक्ष, नेशनल एक्स सर्विसमैन को-ऑर्डिनेशन कमेटी
एमएसपी और किसानों की जमीन सुरक्षित रहनी चाहिए
अच्छे और कृषि कानून बने हम इसके पक्षधर हैं। मगर इन कृषि कानूनों का फायदा वाकई किसानों को हो, इस बात को भी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी सरकार की होनी चाहिए। इस मुद्दे पर कई दल राजनीति कर रहे हैं। जो नेता कल तक कृषि कानूनों में बदलाव की बात कर रहे थे, वो आज इनका विरोध करते दिख रहे हैं। इसलिए किसानों को ऐसे नेताओं से भी सतर्क रहना है। सरकार जल्द इस आंदोलन का सकारात्मक हल निकाले, क्योंकि इस ठंड में अन्नदाता ठिठुर रहा है, इससे बड़ी विडंबना नहीं हो सकती।
- वेंकटेशन नारायण, सहायक महासचिव, नेशनल एक्स सर्विसमैन को-ऑर्डिनेशन कमेटी।
किसानों को समझे सरकार
हठधर्मिता किसी भी आंदोलन का हल नहीं हो सकती। किसान प्रेक्टिकल है और सीधे खेत की चुनौतियों व समस्याओं से जुड़े हैं। किसान जानते हैं कि इन कृषि कानूनों से उन्हें क्या नुकसान हो सकता है। इसलिए किसानों की बात को सरकार को समझना चाहिए। कानून बनाते हुए भी किसानों की भागीदारी व उनकी राय ली जानी चाहिए थी। जब पिछले कई दिनों से किसान पंजाब में धरने-प्रदर्शन कर रहे थे, तभी सरकार को उन्हें बातचीत के लिए बुलाना चाहिए था। अगर समय रहते ऐसा होता, तो आज इतने बडे़ आंदोलन की नौबत न आती।
- कैप्टन जगदीश वर्मा, चेयरमैन, पूर्व सैनिक संगठन व नेशनल फेडरेशन ऑफ डिफेंस ऑनरेरी कमिशन अफसर।