कृषि कानूनों के विरोध में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान किसानों की तरफ से ट्रैक्टर परेड निकालने की चेतावनी दी गई थी। इस चेतावनी के बाद अब पूर्व सैनिकों ने किसानों से अपील की है कि वे गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में खलल न डालें।
दिल्ली में हुई एक बैठक में सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने किसानों के नाम एक पत्र भी जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि हमें पूरा विश्वास है कि आंदोलनकारी किसान ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे सेना और देशवासियों का मान कम हो। फिर भी कुछ लोगों द्वारा इस तरह के बयान आ रहे हैं। इसलिए किसान संगठनों को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि असमंजस की स्थिति साफ हो सके।
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लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और ले. ज. डॉ. डीपी वत्स ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री द्वारा गया उद्घोष जय जवान जय किसान केवल एक नारा नहीं है, यह देश की सच्ची भावना है। देश का सैनिक सीमा पर डटकर दुश्मनों से रक्षा करता है तो किसान अपने खेतों में अन्न उगाकर देश का पेट भरता है। इतिहास गवाह है कि दूसरे देशों से युद्ध के समय किसानों ने सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया है और विजय दिलाई है।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह एक आधिकारिक कार्यक्रम होता है और यह देश की प्रतिष्ठा और सम्मान के साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि किसान इस दिन दर्शक दीर्घा में बैठें और सेना का मनोबल बढ़ाएं। बैठक में रि. ब्रिगेडियर डा. भुवनेश चौधरी, कन्हैया लाल सिंह, आरके बग्गा, मोहित शर्मा, रि. कमांडर वीएम त्यागी, लेफ्टिनेंट यूएस बोरा, सीपीओ रंजीत सिंह, कोमल सिंह, एसवी सिंह, जय चंद, कर्नल संतपाल, अजीत सिंह, आजाद सिंह, धर्मेंद्र सिंह, डीके चौधरी, भूपेंद्र सिंह, राज सिंह आदि मौजूद रहे ।