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उपान्यास कुंवारी दुल्हन में दिखाया ग्रामीण परिवेश की महिला का संघर्ष

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टैगोर थिएटर में उपन्यास कुंवारी दुल्हन का विमोचन करते प्रो सौभाग्यवर्धन, कवि जय गोपाल अश्क व अन्? - फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। लेखिका डॉ. उर्मिला कौशिक सखी के उपन्यास ‘कुंवारी दुल्हन’ का विमोचन उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रोफेसर सौभाग्य वर्धन ने किया। लेखिका ने उपन्यास में 40 वर्ष पहले की ग्रामीण पृष्ठभूमि में महिलाओं के संघर्ष को दिखाने की कोशिश की है। इसकी कहानी एक लड़की के इर्द गिर्द घूमती है, जिसका गांव के अमीर लड़के रेप करते हैं। लेकिन लड़की का पिता समाज परिवार की मान-मर्यादा को ऊंची रखने के लिए लड़कों पर कार्रवाई नहीं करवाता। इससे आहत लड़की खुद अपने दोस्त के साथ मिलकर उन लड़कों की हत्या की योजना बनाती है और प्रतिशोध लेती है। उपन्यास में महिलाओं के प्रति समाज के दोगले रवैए पर कटाक्ष किया गया है।
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कवियों ने अपनी रचनाओं से समा बांधा
उपन्यास विमोचन के साथ इस दौरान कवि सम्मेलन का भी आयोजन करवाया। कार्यक्त्रस्म की अध्यक्षता कवि जय गोपाल ‘अश्क’ अमृतसरी ने की। कवि सम्मेलन में उर्मिला कौशिक ने कहा कि वो मेरी रूह में बसता है, बस इतना फसाना है, मैं उसकी हो तो जाऊं पर मेरे आगे जमाना है। कवि जय गोपाल ‘अश्क’ ने कहा कि मेरे माहौल में वो अजनबी मालूम होती है, मेरे लब तक जो आई है, हंसी मालूम होती है। इस मौके पर अन्य कवियों ने अपनी गजल व नज्में पढ़ीं।
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