चंडीगढ़। डीसी मनदीप सिंह बराड़ की अध्यक्षता में वीरवार को ट्रेडर्स वेलफेयर बोर्ड की पहली बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि आबकारी एवं कराधान विभाग के सभी इंस्पेक्टर व ईटीओ 12 से एक बजे तक कार्यालय में बैठेंगे और व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करेंगे। बैठक में यह फैसला भी लिया गया कि असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर व असिस्टेंट लेबर कमिश्नर भी ट्रेडर्स वेलफेयर बोर्ड की बैठक में शामिल होंगे। बोर्ड की बैठक में चंडीगढ़ व्यापार मंडल के सदस्य और चंडीगढ़ जिला प्रशासन के कई अधिकारी मौजूद रहे।
यूटी के रेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में व्यापारियों ने कई मांगें रखीं। इनमें कुछ मांगें जीएसटी काउंसिल को भेजी जाएंगी, जबकि कुछ मांगों को डीसी ने मौके पर ही सुलझा दिया। चंडीगढ़ व्यापार मंडल की सबसे बड़ी मांग थी कि सी-फॉर्म की आवश्यकता के बिना सभी पूर्व जीएसटी, वैट कराधान आकलन मामलों को समाप्त करने के लिए एकमुश्त निपटान या डीम्ड असेसमेंट योजना की प्रारंभिक घोषणा, साल 2013-14 तक मूल्याकंन किए मामलों में सुधार की अनुमति अपील के बिना दी जानी चाहिए, आयकर की तर्ज पर जीएसटी मामलों की जांच/लेखापरीक्षा की समय सीमा भी वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की नियत तारीख से तीन साल तय किए जाने और कोरोना से हुई व्यापारियों की मृत्यु होने पर व्यापारियों और उनकी फर्म को दस लाख रुपये तक की राहत देने की मांग की। इन सभी मांगों पर डीसी बराड़ ने कहा कि जो स्थानीय स्तर पर हल हो सकती हैं, उन्हें प्राथमिकता तौर पर सुलझाया जाएगा। कुछ मुद्दों को जीएसटी काउंसिल में भी भेजा जाएगा। बैठक में व्यापार मंडल के प्रेसिडेंट चरणजीव सिंह, एडवाइजर कम चेयरमैन राम करण गुप्ता, जनरल सेक्रेटरी संजीव चड्डा व कमलजीत सिंह पंछी व दीवाकर साहुंजा मौजूद रहे।