चंडीगढ़ स्थित जीएमसीएच-32 में फिर संक्रमित मरीज के परिजनों की जान खतरे में डाल दी गई। अस्पताल के कर्मचारी पीपीई किट पहनकर खड़े रहे जबकि वार्ड से एंबुलेंस तक संक्रमित मरीज को परिजन खुद लेकर गए। हद तो यह हुई कि परिजनों को पीपीई किट तक नहीं दी गई। अस्पताल कर्मियों की यह लापरवाही किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है। जिम्मेदार अधिकारियों को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
जीएमसीएच-32 में भर्ती सेक्टर-32 के ही कोरोना संक्रमित सुमित कुमार (बदला हुआ नाम) की बुधवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल सेक्टर-48 के कोविड अस्पताल में शिफ्ट करने को कहा गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने सुमित के परिजनों को फोन करके अस्पताल बुलाया। परिजन जब अस्पताल पहुंचे तो उन्हें एक स्ट्रेचर थमा दिया गया। परिजनों ने बिना पीपीई किट के ही मरीज को वार्ड से स्ट्रेचर पर लिटाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। उसके बाद सेक्टर-48 के हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। इसके बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने परिजनों को वापस घर भेज दिया।
खाना देने जाते हैं तब गेट से ही लौटा देते हैं
जीएमसीएच-32 में भर्ती पॉजिटिव मरीजों के परिजनों का कहना है कि जब कोई काम करना होता है तो हमें घर से बुलाया जाता है लेकिन बाकी समय अगर हम अपने मरीज को खाना, जूस या जरूरत की कोई चीज देने के लिए अस्पताल पहुंचते हैं तो हमें गेट से ही वापस कर दिया जाता है। एक मरीज के परिजन का कहना है कि क्या अस्पताल प्रशासन को यह लगता है कि बस मरीज को खाना देने से ही कोरोना फैलता है। एक मरीज के परिजन ने बताया कि इसका विरोध करने पर मरीज के इलाज में अनदेखी की चेतावनी दी जाने लगती है।
संक्रमण के नाम पर हमारे मरीज का चेहरा तक नहीं दिखाया
कोरोना पॉजिटिव एक मरीज के परिजन ने बताया कि संक्रमण के नाम पर अस्पताल वालों ने मौत के बाद उनके मरीज का चेहरा तक नहीं देखने दिया। बार-बार मिन्नतें करने पर यही जवाब मिला कि मृतक के पास जाने या उसकी बॉडी को हाथ लगाने से दूसरे व्यक्ति को भी कोरोना हो सकता है। एक तरफ तो लोग इस बात का हवाला दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ धड़ल्ले से मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
जीएमसीएच में कोविड के नोडल अधिकारी डॉ. हरीश दसारी हैं। उनसे इस संबंध में जानकारी ली जाएगी। अगर गड़बड़ी मिली तो तत्काल उचित कार्रवाई की जाएगी।
- सरप्रीत सिंह गिल, विशेष स्वास्थ्य सचिव
जीएमसीएच में लापरवाही लगातार
जीएमसीएच-32 में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले यहां की अव्यवस्थाओं से आहत होकर कोरोना संक्रमित एक मरीज ने आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या करने वाले मरीज के सीधे संपर्क में आए चार सुरक्षाकर्मियों को क्वारंटीन करने में भी लापरवाही बरती गई थी। यही नहीं, अस्पताल की इमरजेंसी में कोरोना के संदिग्ध मरीजों को सामान्य मरीजों के बीच भर्ती करना हो या संक्रमितों के शव परिजनों से पैक कराने का मामला हो, अमर उजाला लगातार इन लापरवाहियों को प्रशासन और अफसरों के संज्ञान में लाता रहा है।