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विधानसभा चुनाव: पंजाब लौटते किसानों ने बढ़ाई सियासी दलों की धड़कनें, कांग्रेस के सामने एक नहीं कई चुनौतियां

Sun, 12 Dec 2021 02:13 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

दिल्ली सीमा से लौटते किसानों ने पंजाब में राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज कर दी हैं। हर कोई किसानों को लुभाना चाहता है। दरअसल, पंजाब में इस बार किसानों की भूमिका निर्णायक है। उधर, कांग्रेस के सामने चिंताजनक स्थिति है। किसान नेताओं ने कांग्रेस को कर्जमाफी का पिछला वादा याद दिलाया और हिसाब लेने की बात कह दी है।
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दिल्ली सीमा से लौटते किसान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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दिल्ली की सीमाओं से ढोल-नगाड़ों के साथ शुरू हुई किसानों की घर वापसी का पंजाब में जोरदार स्वागत हो रहा है। जगह-जगह पर नेता सड़कों पर किसानों के स्वागत के लिए खड़े हैं लेकिन प्रदेश के चुनावी माहौल के बीच किसान आंदोलन की समाप्ति ने सियासी दलों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। किसानों की वापसी से साथ चुनावी रुख बदलेगा, क्योंकि सभी दलों के लिए किसान नेता महत्वपूर्ण हो गए हैं। 

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उधर, कांग्रेस से कर्ज माफी के वादे का किसान हिसाब लेने की तैयारी में हैं। संयुक्त किसान मोर्चा खुद भी चुनाव लड़ने पर फैसला ले सकता है। वरिष्ठ किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने इस बात के संकेत दिए हैं। विधानसभा चुनाव-2022 के लिए रणनीति बनाने में जुटे पंजाब के सभी राजनीतिक दलों के लिए अब किसान आंदोलन मुद्दा नहीं रह गया फिर भी किसानों की जीत में अपने योगदान को भुनाने की होड़ लग रही है। 

सभी राजनीतिक दल भले ही किसानों की घर वापसी का स्वागत कर रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी सत्ताधारी कांग्रेस के लिए है, क्योंकि कर्ज माफी जैसे वादों का हिसाब लेने का एलान 32 किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चा ने दिल्ली से रवाना होने से पहले ही कर दिया है। 

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अकाली दल को एक बार फिर से किसानों को समझाना होगा कि पार्टी ने तीन कृषि कानूनों का विरोध किया था। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, जो अब कांग्रेस से अलग होकर भाजपा से निकटता बढ़ा रहे हैं, उन पर कृषि कानूनों को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी से साठ-गांठ के आरोप लगने शुरू हो गए हैं।

डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस

प्रदेश के सभी सियासी दलों के लिए किसान नेता अचानक सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। सियासी दलों को महसूस होने लगा है कि ग्रामीण वोटों का रुख अब किसान नेताओं द्वारा ही तय होगा। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, जिस पार्टी के खिलाफ अंगुली उठा देंगे, विधानसभा चुनाव में उसकी नैया पार लगना असंभव होगा। कांग्रेस ने इन्हीं हालात को भांपते हुए डैमेज कंट्रोल के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने शुक्रवार को ही आंदोलन में शहीद 11 किसानों के परिजनों को सरकारी नौकरी के पत्र सौंपे। साथ ही, संयुक्त किसान मोर्चा को पंजाब पहुंचते ही मिलने का न्योता भी दे दिया है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने अब पंजाब में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने ही एलान कर दिया है।

कांग्रेस ने 2017 के घोषणा पत्र में किसानों और खेत मजदूरों की कर्ज माफी का वादा किया था लेकिन 2 लाख रुपये तक के ही कर्ज माफ किए गए और वह भी 2 से 5 एकड़ भूमि वाले किसानों के। अब विधानसभा चुनाव को देखते हुए किसान संगठनों ने संपूर्ण कर्ज माफी की मांग तेज करने का फैसला किया है। वरिष्ठ किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया है कि घर (पंजाब) पहुंचने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा राज्य सरकार से कर्ज माफी के मुद्दे पर हिसाब लेगा।

अकाली दल और बसपा का गणित गड़बड़ाया

किसान आंदोलन से इतर दलितों और जाट सिखों के सहारे चुनाव जीतने की रणनीति बना रहे अकाली दल व बसपा के गठबंधन के लिए भी अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना जरूरी हो गया है। पवित्र ग्रंथ की बेअदबी और कोटकपूरा पुलिस फायरिंग के आरोप झेल रहे अकाली दल ने अपनी पूरी ताकत सिखों को यह समझाने में लगा रखी थी कि पार्टी और इसके नेता बेकसूर हैं।

वहीं, बसपा अन्य मुद्दों को छोड़ प्रदेश के दलित वोटरों को एकजुट करने में जुटी थी लेकिन घर लौटे किसानों का अकाली दल के प्रति कैसा रवैया रहेगा, यह अगले कुछ दिनों में ही सामने आ जाएगा, क्योंकि केंद्र सरकार ने जब यह कानून पास किए थे, तब अकाली दल एनडीए का हिस्सा था और पार्टी ने तीनों कानूनों का समर्थन किया था। कांग्रेस ने अपने चुनाव अभियान में अकाली दल की इसी कमजोर नस को अपना हथियार बना रखा है।

संयुक्त किसान मोर्चा भी उतर सकता है चुनाव में

केंद्र सरकार के खिलाफ एक साल के लंबे संघर्ष में जीत हासिल करने के बाद 32 किसान संगठनों का संयुक्त मोर्चा उत्साह से भरा है। किसान नेता राजेवाल ने संकेत दिए हैं कि पंजाब लौटने के बाद संयुक्त मोर्चा विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल के रूप में उतरने पर भी विचार करेगा। उन्होंने कहा कि हालांकि अब तक किसान आंदोलन को किसी भी सियासी दल से अलग पूरी तरह गैर-राजनीतिक दल के रूप में चलाया गया है लेकिन पंजाब में अगर किसानों के मुद्दों का कोई हल होता दिखाई नहीं दिया तो संयुक्त मोर्चा खुद सियासत में उतरने पर विचार करेगा। 
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मैं ‘आप’ का सीएम फेस नहीं: राजेवाल

किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने एक बार फिर इन कयासों का खंडन किया कि वह आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने फिर कहा कि इस मुद्दे पर उनकी कोई बात आप के नेताओं से नहीं हुई है। वैसे उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप की तरफ से उनसे संपर्क किया गया तो वह विचार करेंगे। फिलहाल आम आदमी पार्टी या अन्य किसी दल से जुड़ने के बारे में उन्होंने कोई फैसला नहीं किया है।

एमएसपी गारंटी की जोरदार हिमायत कर रही आप

पंजाब में प्रमुख सियासी दल जहां किसानों के सामने डिफेंसिव मोड में नजर आ रहे हैं, वहीं आम आदमी पार्टी ने तीन कृषि कानूनों को साइड करते हुए एमएसपी गारंटी की जोरदार हिमायत शुरू कर दी है। आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल इन दिनों पंजाब में अपनी प्रत्येक चुनावी सभा में एमएसपी गारंटी के लाभ गिना रहे हैं।

उनका कहना है कि यह गारंटी किसानों, प्रदेश व केंद्र सरकारों और फसल विविधता को बढ़ावा देने में कारगर साबित होगी। उन्होंने एमएसपी गारंटी के चलते केंद्र सरकार को होने वाली आय के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान को नकार दिया है, जिसमें कहा गया था कि एमएसपी की गारंटी से सरकार को 18 लाख करोड़ रुपये का घाटा होगा। केजरीवाल पूरे आंकड़ों के साथ पंजाब के लोगों को समझाने में जुटे हैं कि एमएसपी की गारंटी आसान है, बस एनडीए और कांग्रेस ही इसे टालते रहे हैं।
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