शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों के वार्षिक चुनाव में एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी हैट्रिक बनाते हुए लगातार तीसरी बार अध्यक्ष चुने गए। एसजीपीसी कार्यालय स्थित तेजा सिंह समुंदरी हॉल में हुए चुनाव में धामी को कुल 137 वोट में से 118 वोट मिले। विपक्षी उम्मीदवार बाबा बलबीर सिंह घुन्नस को 17 वोट मिले, जबकि 2 वोट रद्द हो गए।
जनरल हाउस में श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी और श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी सुल्तान सिंह, श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह और एसजीपीसी के 137 सदस्य शामिल हुए। इस दौरान तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह नहीं पहुंचे।
अध्यक्ष चुने जाने के बाद एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने हरभजन सिंह मसाना को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, गुरबख्श सिंह को जूनियर उपाध्यक्ष और राजिंदर सिंह मेहता को सर्वसम्मति से महासचिव चुना। इसके अलावा कार्यकारिणी कमेटी के लिए भी सर्वसम्मति से 11 सदस्य चुने गए। इनमें मोहन सिंह बंगी, रघबीर सिंह, जसमेर सिंह, खुशविंदर सिंह भाटिया, बीबी हरदीप कौर, इंद्रमोहन सिंह, गुरप्रीत सिंह झब्बर, मलकीत कौर, अमरजीत सिंह, बीबी जसपाल कौर शामिल हैं। विपक्ष से जसवंत सिंह पुड़ैल को कार्यकारिणी में एक सीट दी गई हैं।
शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष चुने जाने के बाद धामी और अन्य पदाधिकारियों ने श्री हरिमंदर साहिब और अकाल तख्त में माथा टेका। इन्हें मुख्य ग्रंथी सिंह ज्ञानी रघबीर सिंह ने गुरु बख्शीश सिरोपा भेंट किया।
बंदी सिंहों की रिहाई का बड़ा मुद्दा: धामी
एडवोकेट धामी ने कहा कि गुरु साहिब के आशीर्वाद से उन्हें तीसरी बार यह सेवा मिली है। उन्होंने अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और एसजीपीसी के सभी अकाली दल सदस्यों का भी धन्यवाद किया। धामी ने कहा कि वे यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि सिख पंथ की प्रतिनिधि संस्था की सेवाएं पंथक भावनाओं के अनुरूप हों। आज सिख समुदाय के सामने बंदी सिंहों की रिहाई का बड़ा मुद्दा है। इसके लिए उचित कदम उठाएंगे।
सिख सरोकारों की गहरी समझ के कारण तीसरी बार चुने गए
लगातार तीसरी बार अध्यक्ष चुने गए एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी लंबे समय से एसजीपीसी के साथ जुड़े हुए हैं। 1956 में जन्मे पेशे के वकील हरजिंदर सिंह ने बीए, एलएलबी की डिग्री हासिल की है और चार दशकों से वकालत कर रहे हैं। वह 1996 में पहली बार एसजीपीसी के सदस्य बने और तब से लगातार सदस्य हैं। वह धर्म प्रचार के भी सदस्य थे और एसजीपीसी की कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे। एडवोकेट धामी को 2019 में एसजीपीसी का महासचिव चुना गया था, जिसके बाद उन्होंने 2020 में एसजीपीसी के मुख्य सचिव के प्रशासनिक पद पर कार्य किया। उसके बाद नवंबर 2021 में वह पहली बार एसजीपीसी के अध्यक्ष बने। उन्हें सिख सरोकारों की गहरी समझ है। उन्हें एक ईमानदार नेता के रूप में जाना जाता है। धामी अदालतों में सिख संघर्ष के योद्धाओं के मामलों की पैरवी कर रहे हैं।