नगर निगम में भाजपा का राज आने के बाद अब मनोनीत पार्षद खुलकर कांग्रेस के खिलाफ आ गए हैं। जबकि मेयर अरुण सूद के जीतने के बाद कांग्रेस का भी मनोनीत के प्रति व्यवहार बदल गया है।
12 फरवरी को हुई सदन की बैठक में जब मेयर ने पूर्व मेयर पूनम शर्मा को समय न देकर मनोनीत पार्षद शगुफ्ता प्रवीण को बोलने का समय दिया तो कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार कर दिया था।
ऐसे में सोमवार को मनोनीत पार्षद सुरेंद्र बग्गा ने कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का खंडन करते हुए प्रेस विज्ञप्ति जारी की है, इसमें बग्गा ने कहा है कि कांग्रेस के मुकेश बस्सी और पूनम शर्मा द्वारा मेयर चुनाव हारने के बाद कहा गया था कि मनोनीत पार्षद अवसरवादी हैं।
बग्गा का कहना है उन्होंने 2012 से 2015 तक कांग्रेस का साथ दिया। पिछले साल कांग्रेस के आठ पार्षद होने के बावजूद मनोनीत पार्षदों ने कांग्रेस को मेयर पद पर जीताया।
उनका कहना है कि क्या उस समय वह अवसरवादी नहीं थे। उन्होंने कहा, मेरिट के आधार पर भाजपा उम्मीदवार को मत दिया है। बग्गा ने यह भी कहा है कि कांग्रेस के पूर्व मेयर की प्रशासन के साथ कोआर्डिनेशन की कमी रही और उनका काम सिर्फ अखबारों में किसी न किसी तरह से छाए रहने की रणनीति रही।
बग्गा का कहना है कि मेयर चुनाव के बाद कांग्रेस के पार्षद उन पर निजी टिप्पणी भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सभी सीनियर राजनीतिज्ञ हैं, ऐसे में वह अलोकतांत्रिक भाषा का प्रयोग न करें। उन्होंने कहा कि भविष्य में सदन की बैठक में कांग्रेस की ओर से कहे गए अपशब्दों को मनोनीत बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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सभी मनोनीत पार्षद नगर निगम के अहम अंग हैं। उन्हें प्रशासन की ओर से अलग अलग फिल्ड में विशेषज्ञता के कारण ही चयन किया गया है। हाल ही में हुई सदन की बैठक में कांग्रेस की ओर से अलोकतांत्रिक भाषा का प्रयोग किया गया, जो गलत था। सदन में जितना बोलने का अधिकार कांग्रेस का है उतना ही अधिकार मनोनीत पार्षदों का भी है।
-अरुण सूद, मेयर
सदन में किसी ने भी मनोनीत पार्षदों के लिए अलोकतांत्रिक भाषा का प्रयोग नहीं किया है। मनोनीत पार्षदों का कांग्रेस पहले भी सम्मान करती थी और अब भी सम्मान करती है। उनका बहिष्कार सिर्फ मेयर के व्यवहार पर था।
-प्रदीप छाबड़ा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष