चंडीगढ़। पेक के 100 साल पूरे होने के इस कार्यक्रम में शामिल हो पाना उनके लिए गर्व का पल है। वह बहुत सम्मानित महसूस कर रहे हैं कि पेक के 100 साल पर होने वाले 16 नवंबर को राष्ट्रपति आगमन के कार्यक्रमों की तैयारियां और इसकी भागीदारी में हिस्सा ले रहे हैं। पेक के एलुमनी के तौर पर उनका लक्ष्य है कि पेक को विश्वस्तरीय संस्थान बनाने का प्रयास करूं। इसके लिए पेक के निदेशक के साथ मिलकर विचार-विमर्श कर योजनाओं पर काम हो रहा है। पेक में मंगलवार को 100 साल पूरे होने के सांकेतिक कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में पहुंचे यूटी प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने संबोधन के दौरान ये बातें कहीं।
सलाहकार धर्मपाल ने बताया कि पेक ने तकनीकी शिक्षा में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। कल्पना चावला, प्रोफेसर सतीश धवन और वर्तमान में नासा के मार्स-2020 मिशन में अहम योगदान देने वाली वंदना वर्मा के साथ हजारों एलुमनी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उच्चतर पदों पर कॉलेज का नाम रोशन कर रहे हैं।
पेक निदेशक डॉ. बलदेव सेतिया ने बताया कि पेक के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य को लेकर यूटी प्रशासन के साथ 15 से 20 दिनों से तैयारियां चल रही थीं। उनकी इच्छा थी कि देश के पहले सदस्य राष्ट्रपति इस मौके पर साल भर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत करें। तकनीकी शिक्षा सचिव एसएस गिल ने कोविड-19 के दौरान अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के मामले में चंडीगढ़ के लिए पेक के योगदान की सराहना की, जिसका आबादी पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा। आगामी दिनों में तकनीकी शिक्षा और पेक में शोध को बढ़ावा देने पर विभाग की ओर से काम किया जाएगा। सांकेतिक कार्यक्रम में प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता, तकनीकी शिक्षा सचिव एसएस गिल ने केक काटने की रस्म में हिस्सा लिया। इसके बाद अतिथियों ने पेक के सौंवे साल में प्रवेश करने पर जश्न के गुब्बारे फहराए।