चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 की इमरजेंसी का नजारा इन दिनों पूरी तरह बदल चुका है। यहां खचाखच स्ट्रेचर और मरीज भरे होते थे, अब सामाजिक दूरी नजर आ रही है। स्ट्रेचर की संख्या तो कम हुई ही है, साथ ही भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का तनाव भी कम हो रहा है, क्योंकि कोरोना संक्रमण के बीच एक-दूसरे से सटे स्ट्रेचर पर भर्ती मरीज पर संक्रमण का खतरा हर वक्त मंडराता रहता था। अस्पताल प्रशासन इमरजेंसी पर लगातार बढ़ रहे रेफर मरीजों के दबाव को कम करने के लिए सेक्टर-48 के अस्पताल से मदद ले रहा है। अस्पताल प्रशासन की कार्य योजना का ही परिणाम है कि इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों को बिना विलंब किए वार्ड और सेक्टर- 48 के अस्पताल में शिफ्ट करने की व्यवस्था बहाल की गई है। बॉक्स
सेक्टर-48 अस्पताल से मिल रही मदद
गौरतलब है कि भर्ती मरीजों के दबाव को कम करने के लिए ही सेक्टर 48 के अस्पताल में जीएमसीएच 32 के 4 विभागों के वार्डो को स्थानांतरित किया गया था। उन विभागों के स्थानांतरित होने से जीएमसीएच 32 में बेड की कमी की समस्या का समाधान संभव हो पाया है। उनमें ईएनटी, रेडियोथैरेपी, मनोचिकित्सा और त्वचा रोग विभाग शामिल है।
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पहल हर तरफ था संक्रमण का खतरा
जीएमसीएच-32 की इमरजेंसी में कोविड के पहले से लेकर पिछले कुछ दिनों तक लगातार भीड़ का आलम बरकरार था। इमरजेंसी की स्थिति ऐसी थी कि वहां मरीजों के परिजनों को खड़े रहने के लिए भी जगह मिलना मुश्किल होता था। स्ट्रेचरों के बीच इतनी भी दूरी नहीं होती थी कि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ वहां खड़े होकर मरीज को दवा और इंजेक्शन से पाएं।
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स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों की संख्या नियंत्रित करने के लिए सेक्टर-48 के अस्पताल में मरीजों को स्थानांतरित किया जा रहा है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को यहां से शिफ्ट कर दिया जा रहा है जिससे इमरजेंसी का दबाव कम होने के साथ ही स्ट्रेचर की संख्या भी तेजी से कम हो रही है।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32