पीजीआई के मनोचिकित्सक विभाग की सर्वे रिपोर्ट ने चंडीगढ़ में नशे के चलन पर चिंता जताई है। वहीं रिपोर्ट में नशे के लिए एक नए तरीके का जिक्र भी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ में करीब सात हजार लोग ड्रग्स लेते हैं। इनमें सबसे ज्यादा इंजेक्शन के जरिए ड्रग्स लेने की बात सामने आई है। करीब 40 प्रतिशत उन दवाओं को नशे के लिए इस्तेमाल करते हैं जो सिर्फ डॉक्टर की प्रेसक्राइब या ड्रग्स एडिक्शन सेंटर में उपलब्ध हैं। पीजीआई ने सवाल उठाया है कि आखिर यह दवाएं नशेड़ियों के पास कैसे पहुंच रही है। यह चलन काफी चिंताजनक है। इंजेक्शन से ड्रग लेने का सीधा मतलब एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियां को न्योता देना है।
इन दवाओं का नशे में हो रहा इस्तेमाल
पीजीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ड्रग्स के तौर पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल ब्यूप्रिनोरफिन या पेंटजोसिन दवा का किया जा रहा है। इस ड्रग्स को इंजेक्शन के जरिए लेेते हैं। पीजीआई ने यह भी बताया है कि नशेड़ियों के पास ये दवाएं ड्रग डीलर और केमिस्ट शॉप के जरिए पहुंच रही है। ब्यूप्रिनोरफिन असल में दर्द दूर करने की दवा है जबकि डिपहेनोक्सिलेट का इस्तेमाल डायरिया में होता है।
74 प्रतिशत लोगों में मजे के लिए पड़ी लत
पीजीआई ने अपनी स्टडी में पाया है कि चंडीगढ़ के 74.7 प्रतिशत लोगों ने मजे के लिए नशे को चखा और उनमें इसकी लत पड़ गई। 64.33 प्रतिशत लोगों ने उत्सुकता के लिए नशे को चखा और वे इसके आदी हो गए। इसी तरह से 53 प्रतिशत लोगों ने दोस्तों के दबाव, कुछ ने फैमिली प्राब्लम के चलते और कुछ लोगों ने अपनी सेक्स क्षमता को बढ़ाने के लिए नशे को अपनी आदत बना लिया।
चंडीगढ़ का हर 15वां व्यक्ति नशे का सेवन करता है
पीजीआई ने स्टडी के दौरान पाया कि चंडीगढ़ का हर 15वां शख्स किसी न किसी नशे का सेवन करता है। इसमें हर 20वां व्यक्ति शराब का सेवन करता है, जबकि हर 31वां व्यक्ति तंबाकू का नशा लेता है। करीब 14 हजार लोग शराब पर निर्भर हैं, जबकि 18 हजार तंबाकू पर आश्रित हैं। सात हजार लोग ड्रग्स का सेवन करते हैं। नशे के आदी हर 19वें शख्स ने माना है कि उसे नशा करने के बाद स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत आई है। जबकि हर दसवें नशेड़ी की परिवार के साथ नोंकझोंक भी हुई है।
जानकारी देने पर 200 रुपये का रिचार्ज कूपन दिया
पीजीआई के डाक्टरों ने बताया कि रेपिड असेस्समेंट सर्वे के दौरान जिन लोगों से बात की गई है, उन्हें प्रोत्साहन के तौर पर 200 रुपये का रिचार्ज कूपन दिया गया। दरअसल इस सर्वे में उन लोगों से बात की गई है, जो ड्रग्स का सेवन करते हैं। आमतौर पर कोई भी बताने को तैयार नहीं होता कि वह ड्रग्स का सेवन करता है।
प्रिस्क्राइब दवा नशेड़ियों के पास पहुंच रही है, जो काफी चिंताजनक ट्रेंड हैं। इससे पता चलता है कि चंडीगढ़ में सरकारी तंत्र ठीक ढंग से काम नहीं कर रहा है। इसकी रिपोर्ट चंडीगढ़ प्रशासन को सौपेंगे, ताकि वे इसके अनुसार नीति तैयार कर सकें।
- डा. अजीत अवस्थी, एचओडी मनोचिकित्सक पीजीआई