पंजाब में हर साल 60 हजार करोड़ रुपये का नशे का कारोबार होता है। केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश ने गुरुवार को संसद में नशे के मुद्दे पर यह बात कही। उन्होंने सूबे में नशे से पैदा हुए हालात का जिक्र करते हुए उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें पूर्व डीजीपी शशिकांत ने तत्कालीन सरकार को यह जानकारी दी थी कि राज्य में नशे के कारोबार में 15-20 राजनेता और अफसर शामिल हैं।
सोमप्रकाश ने कहा कि दुनिया में ड्रग तीसरा बड़ा कारोबार है लेकिन संतों, पीरों-फकीरों की धरती पंजाब इसकी चपेट में इस सीमा तक आ चुकी है कि खन्ना में एक दूधमुंहे बच्चे को ‘स्मैक ब्वाय’ का नाम दे दिया गया है क्योंकि उसकी माता नशा करती थी और माता के दूध से बच्चे को पैदा होते ही नशा मिला और आज वह बच्चा कोई और दूध नहीं पीता।
सोमप्रकाश ने अमृतसर जिले के गांव मकबूलपुरा के उन 384 परिवारों का उल्लेख भी किया जो नशे के कारोबार से जुड़े हैं और उनके 100 लोग जेलों में बंद हैं। इस गांव में 60 फीसदी लोग नशा करते हैं। सांसद ने तरनतारन के एक गांव में जिम चलाने वाले युवक का भी जिक्र किया, जिसने मीडिया को बताया था कि वह 40 लोग एक साथ पढ़कर बड़े हुए थे लेकिन इनमें से 30 लोग नशे के कारण मर चुके हैं।
सोमप्रकाश ने कहा कि पंजाब विधानसभा में हर बार नशे के मुद्दे पर चर्चा होती है लेकिन सभी सियासी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने के अलावा, इस बीमारी से निजात का कोई हल नहीं तलाशते। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से ड्रोनों के जरिये पंजाब पहुंच रहे ड्रग बहुत बड़ी समस्या बन चुके हैं, जिससे निपटने के लिए केंद्र सरकार को सहयोग करना चाहिए।