शिकायतकर्ता के अनुसार रिश्वत की राशि न मिलने पर ड्रग कंट्रोलर ने विभाग से उसे नोटिस भिजवा दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता विजिलेंस के पास पहुंचा और शिकायत दी। विजिलेंस ने ट्रैप लगाकर अशोक नरूला को रंगे हाथ 25 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया और सुनील चौधरी व अशोक नरूला के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए उसने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली लेकिन वहां से भी याची को झटका लगा है।
हाईकोर्ट ने की थी अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता ड्रग इंस्पेक्टर है जो हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का महत्वपूर्ण पद है। उस पर बाजार निगरानी, नकली दवाओं का पता लगाना जैसी अहम जिम्मेदारी हैं। आम लोगों को दवाओं के बारे में जानकारी नहीं होती है और वे सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों के प्रति आशा रखते हैं कि वे अपना काम ठीक से कर रहे होंगे क्योंकि मेडिकल क्षेत्र के बेइमानों पर अंकुश लगाने के लिए ही ड्रग इंस्पेक्टरों और नियंत्रकों की नियुक्त की जाती है और इन्हें सार्वजनिक खजाने से वेतन भुगतान होता है।